गांधीनगर गल्ला मंडी में गरम मसाले की बिक्री संवाद
बस्ती। किचन से आने वाली मसालों की वह भीनी-भीनी खुशबू अब आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही है। मसालों और तेलों की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों की रसोई का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। गृिहणियां पहले महीने की शुरुआत में ही डिब्बे भरकर राशन और मसाले लेती थीं, वे अब सिर्फ जरूरत भर का सामान खरीदकर काम चला रही हैं।
थोक और फुटकर मंडियों में आई मंदी और महंगाई का असर छोटे किराना दुकानों से लेकर थोक बाजारों में देखा जा सकता है। व्यापारियों ने बताया कि इस महंगाई के पीछे का सबसे बड़ा कारण मंडियों से माल की आवक कम होना है। इससे थोक बाजारों में कीमतें बढ़ीं, जिसका सीधा असर अब आम उपभोक्ताओं की थाली पर पड़ रहा है।
आपूर्ति में आई इस कमी ने सरसों के तेल से लेकर रोजमर्रा के पीसे मसालों तक की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। मसाले का रेट 40 से 60 रुपये प्रति किलो बढ़ गए। बाहर से आने वाले खाद्य पदार्थ, पेट्रोल-डीजल और गैस के बढ़े रेट के चलते ट्रक का भाड़ा बढ़ने का असर खाद्य सामग्रियों पर पड़ रहा है।