- बारिश के दौरान मेडिकल कॉलेज के चिकित्सालय भवन की टपक रही छत
- ओपीडी से लेकर वार्ड तक टायल्स के फर्श पर पानी ही पानी, मरीजों को खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आजकल मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय भवन में संभलकर चलिए। बारिश के दौरान तीस साल पुराने इस भवन की छत जगह- जगह टपक रही है। नीचे टायल्स के फर्श पर पानी होने से फिसलन है। ऐसे में अस्पताल के अंदर चिकित्सक कक्ष या जॉच सेंटर तक जल्दी पहुंचने के चक्कर में लंबे कदम पड़े तो खतरा हो सकता है। हल्की सी चूक पर पैर फिसलेगा तो टांग भी टूट सकती है।
ओपेक अस्पताल चिकित्सालय कैली का निर्माण 30 साल पहले हुआ था। मेडिकल कॉलेज की स्थापना अभी पांच वर्ष पहले हुआ है। यह अस्पताल मेडिकल कॉलेज में मर्ज कर दिया गया है। भवन पुराना होने के कारण कई जगहों पर छत और दीवार जर्जर हो चुकें। अधिकांश खिड़की, दरवाजे में भी टूट गए हैं। जिससे बाहर से मच्छर एवं अन्य कीड़े- मकौड़े उड़कर अंदर आते हैं। इससे चिकित्सक, स्टॉफ, मरीज, तीमारदार हर कोई परेशान हैं।
विभिन्न रोगों से ग्रसित होकर यहां वार्डों में भर्ती मरीजों में मच्छर जनित संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा है। इन दिनों समस्या और बढ़ गई है। बारिश होने के कारण अस्पताल भवन की छत जगह- जगह टपकने लगी है। नीचे फर्श पर पानी पसरा है। ओपीडी के दंत विभाग, ईएनटी, मानसिक रोग विभाग की ओर जाने वाले गलियारे में पानी टपकने से फर्श पर फिसलन हो गई है। यहां जरा सा चूक होने पर मरीज, तीमारदार या चिकित्सक कोई भी फिसलकर गिर सकता है।
इस भय से जानकार लोग कदम संभाल कर रख रहे हैं। वहीं अनजान लोग तेजी से चलने के कारण फिसल जा रहे हैं। कोई गिरकर चोटिल हो रहा है तो कोई लड़खड़ाकर संभल जा रहा है। दो- तीन दिनों से मरीज और तीमारदारों को अधिक सांसत झेलनी पड़ रही है। वहीं भवन की दीवारों में भी नमी आ गई है। ओपीडी कक्ष के सामने से लेकर सर्जरी, मेडिसिन, महिला वार्ड तक अधिकांश शीशे की खिड़कियां टूटी हुई है। बारिश होने पर टूटी खिड़कियों से पानी की बौछार भवन के अंदर आ रही है।
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परिसर में भी हुआ जलमग्न
अस्पताल परिसर में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है। बारिश होने के चलते भवन के बाहर परिसर में भी जगह- जगह जलभराव है। ओपीडी, इमरजेंसी, महिला ओपीडी आदि भवनों में पहुंचने के लिए पानी में घुसकर जाना पड़ रहा है। मरीजों के साथ आए परिजनों को दौड़भाग के दौरान जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जलजनित बीमारियों के भी फैलने की आशंका बढ़ गई है। परिसर में जलभराव और गंदगी से चिकित्सक और कर्मचारी खुद सहमे हुए हैं।
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कोट
जलनिकासी की समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक मदद की जरूरत हैं। अस्पताल के मुख्य नाले पर अतिक्रमण कर लिया गया है। जहां तक भवन जर्जर होने की बात है तो इसके मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा।
-डॉ. समीर श्रीवास्तव, सीएमएस।