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जिला और महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच बंद

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जिला और महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच बंद
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- रेडियोलॉजिस्ट का स्थानांतरण होने से सेवा बाधित, मरीजों निजी अस्पतालों से महंगे दामों में कराना पड़ रहा जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यदि जिला अस्पताल या महिला अस्पताल में मरीज अथवा गर्भवती को अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ जाए तो उसे बाहर निजी सेंटरों से ही अल्ट्रासाउंड कराना पड़ेगा। क्योंकि, इन दोनों चिकित्सालयों में रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। ओपेक चिकित्सालय कैली में तैनात रेडियोलॉजिस्ट करीब छह माह से इन दोनों अस्पतालों को सेवा दे रही थीं। उनका भी शासन के निर्देश पर मेडिकल कालेज प्रशासन ने अस्पताल से रिलीव कर दिया। नतीजतन दोनों अस्पतालों में अल्ट्रासांउड जांच बंद हो गई।
मेडिकल कालेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली से बीते दिनों पीएमएस संवर्ग के 11 चिकित्सकों को रिलीव कर दिया गया। इसमें रेडियोलॉजिटिस भी शामिल हैं। यह रेडियोलॉजिस्ट जिला अस्पताल व महिला चिकित्सालय में सप्ताह में तीन तीन दिन अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित करती थीं, मगर इसके स्थानांतरण के बाद 11 दिन से दो चिकित्सालयों के अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर ताला लटका है। इसके चलते मरीजों को बाहर निजी सेंटरों पर जांच कराना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में यूं तो रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती है, मगर वे तैनाती के बाद से ही बिना बताए अवकाश पर हैं। इसके चलते यहां ताला बंद था। यही हाल महिला अस्पताल का भी था। यहां तो रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती ही पिछले तीन साल से नहीं हो पाई है। इन स्थितियों को संज्ञान में लेकर शासन की ओर से ओपेक चिकित्सालय कैली में तैनात चिकित्सक डॉ. विभा को दोनों अस्पतालों में तीन-तीन दिन सेंटर संचालित करने का निर्देश दिया गया। इस निर्देश के क्रम में वे लंबे समय से इस कार्य को संचालित कर रही थीं कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पांच मई को शासन के निर्देश के क्रम में उन्हें रिलीव कर दिया। नतीजतन इसके बाद दोनों अस्पतालों का भी काम बंद हो गया है।
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निजी सेंटरों पर आठ सौ में होता है अल्ट्रासाउंड
जिला अस्पताल, महिला अस्पताल व ओपेक चिकित्सालय कैली में जहां अल्ट्रासाउंड निशुल्क होता है, वहीं बाहर निजी सेंटरों पर आठ सौ रुपये लिए जाते हैं। चूंकि सर्वाधिक अल्ट्रासाउंड के मरीज महिला अस्पताल से ही निकलते हैं, मगर इनके लिए अस्पताल प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की है।
बोलीं महिलाएं
महिला चिकित्सालय में चिकित्सक को दिखाने आईं गांधी नगर निवासी नम्रता ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले तो यहां अल्ट्रासाउंड कराकर गए हैं, मगर अब यह सेंटर बंद है। बताया जा रहा है कि कैली जाएं अथवा निजी अस्पताल से अल्ट्रासाउंड करा लें। जब सरकार गर्भवती को सभी संसाधन निशुल्क दे रही है तो फिर अव्यवस्था के चलते गर्भवती व उनके तीमारदारों का शोषण किया जा रहा है।
त्रिपाठी गली की निवासी रुबी ने कहा कि ओपीडी में दिखाने के बाद चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड लिख दिया है, मगर अस्पताल में व्यवस्था नहीं है। बाहर के लिए यहां से कैली जाने का मतलब पूरा दिन लग जाता है। ऐसे में अब तो मजबूरी है कि आठ सौ देकर ही अल्ट्रासाउंड कराना होगा।
जिला अस्पताल में चिकित्सक को ओपीडी में दिखाने आए खजूरिया निवासी अंगद विश्वकर्मा ने कहा कि यहां चिकित्सक को दिखाने के बाद अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह डॉक्टर ने दी है, मगर यहां तो व्यवस्था ही नहीं है। जब शिकायत की गई तो बताया गया कि कैली में व्यवस्था है वहां चले जाएं। वहां जाने से बेहतर है निजी चिकित्सालय में आठ सौ देकर अल्ट्रासाउंड करा लें। यहां तो संसाधन हैं, मगर विशेषज्ञ नहीं हैं, जिससे अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है।
परसांव निवासी रामसूरत ने कहा कि जिला अस्पताल में सुविधाएं तो सभी हैं, मगर इसके संचालन की व्यवस्था नहीं है। अल्ट्रासाउंड के लिए आए थे, मगर यहां पता चला कि सेंटर पर ताला लटक रहा है और चिकित्सक के आने के बाद ही इसे संचालित किया जाएगा। ऐसे में बाहर ही अल्ट्रासाउंड कराना होगा।
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बोले एसआईसी
एसआईसी डॉ. आलोक कुमार वर्मा व महिला अस्पताल के सीएमएस केडी पांडेय ने कहा कि स्थानांतरण के चलते यहां सेंटर बंद है। लेकिन मरीजों को ओपेक चिकित्सालय कैली अल्ट्रासाउंड रेफर कर दिया जाता है। वहां मरीजों का निशुल्क अल्ट्रासाउंड होता है। शासन को पत्र लिखा जा रहा है। जिससे यहां स्थापित मशीनों को हर रोज चलाया जा सके।
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