बस्ती। निजी अस्पतालों में हो रही मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग शिकंजा कसने में नाकाम है।
हर मौत के पीछे डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगते हैं। शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने का दम भरता है। अस्पताल सील भी किए जाते हैं, मगर समय के साथ अस्पताल भी खुल जाते हैं और मरीजों की भीड़ भी लगने लगती है। विभाग के इस अभयदान से अस्पताल संचालकों के हौसले टूटने के बजाय बुलंद होते जा रहे हैं। मुंडेरवा, जिगिना, शहर का गड़गोड़िया, कटरा में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया। मरीज उपचार कराने पहुंचे मगर, उन्हें जान से हाथ धोना पड़ा।
15 दिन पहले जिगिना स्थित अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया था। इस अस्पताल में पहली बार ऐसी घटना नहीं हुई है, पहले भी अंगुली उठ चुकी है। करीब एक साल पहले भी इस अस्पताल में हंगामा हुआ था। तब भी डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगे थे। तब स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील किया था। मगर, जिम्मेदारों की मिलीभगत से अस्पताल फिर से खुल गया। दोबारा वही घटना हुई। इस बार ओपीडी, आईपीडी सील किए थे, मगर जानकारों का कहना है कि जांच में भी विभाग खेल कर रहा है। बिना जांच रिपोर्ट के अस्पताल खोल दिया गया है। दूसरा मामला गड़गोड़िया स्थित अस्पताल का है। मरीज की मौत पर बुधवार को परिजनों ने हंगामा किया।
मामले में स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने के बजाय संचालक को अभयदान दे दिया। इससे पहले मालवीय रोड स्थित अस्पताल में बुजुर्ग महिला की मौत हो गई थी। उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगा था, मगर स्वास्थ्य विभाग आंख मूंदे रहा। मौत पर मौत की घटनाएं स्वास्थ्य विभाग के निगरानी तंत्र और सिस्टम पर सवाल खड़ा रहा है। 20 दिन में हुई चार घटनाओं के बाद भी विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है।