बरेली के शीशगढ़ के एक निजी अस्पताल में दुर्लभ विकार के साथ जन्मे बच्चे को देखकर परिजन डर गए। डॉक्टर के मुताबिक बच्चा हार्लेक्विन इक्थियोसिस से ग्रसित था। यह एक दुर्लभ बीमारी है।
बरेली के शीशगढ़ कस्बे के एक निजी अस्पताल में कस्बा निवासी महिला ने दुर्लभ अनुवांशिक विकार (हार्लेक्विन इक्थियोसिस) से ग्रसित बच्चे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के समय उसका बड़ा सिर, बड़ी आंखें व शरीर पूरी तरह सफेद था। त्वचा जगह-जगह से फटी हुई थी। जन्म से ही उसके मुंह में दांत थे।
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बच्चे को देख हैरत में पड़ गए परिजन
जन्म के बाद से ही बच्चा अजीब तरह की आवाजें निकाल रहा था। बच्चे की शक्ल सूरत देख परिजन हैरत में पड़ गए। अस्पताल के डॉक्टर ने उन्हें बच्चे को दिल्ली ले जाने की सलाह दी। बालक के विचित्र होने का पता चलने पर कस्बे में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। दो दिन बाद बच्चे की मृत्यु हो गई।
इस बीमारी का इलाज नहीं
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कर्मेंद्र ने बताया कि इस बीमारी में बच्चे के शरीर में तेल बनाने वाली ग्रंथियां न होने से त्वचा फटने लगती है। इस तरह के बहुत कम मामले ही सामने आते हैं। अक्सर जन्म के दौरान या कुछ घंटों बाद ही बच्चे की मौत हो जाती है। जो बच जाते हैं, उनके भी ज्यादा दिन तक जीवित रहने की संभावना बेहद कम होती है, क्योंकि इसका कोई कारगर इलाज नहीं है।