सीएमओ व पुलिस के कुछ लोग उनके क्लीनिक पर आने वाले हैं। अभी मामला रफा-दफा हो सकता है, वर्ना वह लोग फंस जाएंगे। राजेंद्र अपने दूसरे बेटे मयंक के साथ क्लीनिक पहुंचे तो वहां सीएमओ के रूप में इज्जतनगर के आलोक नगर निवासी सुरजीत, सीएमओ की पत्नी बनकर सोमपाल की पत्नी राजकुमारी व एक अन्य व्यक्ति मिले।
उन्होंने मामला निपटाने के लिए तीन लाख रुपये मांगे। तब मयंक ने एक लाख रुपये नेट बैंकिंग से सोमपाल के खाते में और 1.20 लाख रुपये नकद दिए। आरोपियों ने उन्हें अभिषेक का सामान्य मृत्यु वाला फर्जी प्रमाणपत्र दे दिया गया।
ऐसे खुली पोल
मयंक रविवार को बरेली आए और सीओ प्रथम पंकज श्रीवास्तव से मिले। कॉल करने वाले का नंबर दिखाकर जानकारी लेनी चाही कि आपके दफ्तर से उन्हें बुलाया गया है। सीओ ने पूरा घटनाक्रम पूछा और फिर वह नंबर ट्रेस कराया। ठगी का खेल समझ में आया तो उच्चाधिकारियों को स्थिति बताकर एसओजी भी लगाई।
तब गिरोह के लोगों के चेहरे सामने आने लगे। पुलिस ने पिछली बार सीएमओ बने सुरजीत के साथ ही उसे रामौतार के नाम पर फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले गांव करमपुर चौधरी निवासी मिसिरयार को गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को प्रेसवार्ता के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया। सोमपाल व उसकी पत्नी राजकुमारी फरार है।
परिवार ने शहर छोड़ा पर ठग लगे रहे पीछे
बेटे की मौत व इस घटना के बाद मयंक व उनके परिजनों ने अपना पुश्तैनी घर बेच दिया और नोएडा शिफ्ट हो गए। 23 अगस्त 2024 को एक अनजान नंबर से पहले मयंक को और फिर उनके पिता को कॉल की गई। स्क्रीन पर उप्र पुलिस का लोगो और सीओ ऑफिस बरेली लिखा आया। उधर से बताया गया कि सीओ ऑफिस बरेली से बोल रहे हैं।
पिछले साल आपने अपने बेटे अभिषेक की जहर का इंजेक्शन देकर हत्या कर दी थी। उस मामले को कथित डॉक्टर सोमपाल के साथ मिलकर दबा दिया था। ये फाइल दोबारा खुल गई है। सोमपाल को नोएडा की पुलिस पकड़ ले गई है। आप बरेली आकर हमसे मिलो वर्ना हम नोएडा पुलिस को बोलकर आपको वहीं गिरफ्तार करा देंगे।
एसपी सिटी राहुल भाटी ने बताया कि गिरोह ने राजेंद्र सक्सेना व उनके परिवार से साल भर पहले ठगी की थी। दोबारा से उसी परिवार को ठगी का शिकार बनाने की कहानी रच रहे थे। परिवार ने सीधे पुलिस से संपर्क कर लिया तो यह मामला खुल गया। गिरोह में दो नामजदों के अलावा कुछ और लोगों के होने की संभावना है, उन्हें जल्दी ट्रेस कर गिरफ्तारी की जाएगी।