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नाटक ‘बोधू अहीर’ ने जगाई देशप्रेम की भावना

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नाटक का मंचन करते कलाकार।
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विंडरमेयर में चल रहे राज्य नाट्य समारोह का समापन
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बरेली। विंडरमेयर में पांच दिन से चल रहे राज्य नाट्य समारोह का शुक्रवार को समापन हो गया। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के संयोजन में चल रहे समारोह में अंतिम नाटक ‘बोधू अहीर’ का मंचन किया गया।
आजादी की ज्वाला को अपने रक्त से प्रचंड बनाने वाले न जाने कितने भूले बिसरे रणबांकुरे हैं, जिन्हें आज याद तक नहीं किया जाता। उन्हीं योद्धाओं में से एक नाम आजमगढ़ के बोधू सिंह अहीर का है। आजमगढ़ से नाट्य मंचन के लिए आई संस्था सूत्रधार ने दर्शकों को बोधू सिंह की शख्सियत से परिचित कराया। बोधू अहीर की महज नाटक के तौर पर प्रस्तुति नहीं की गई बल्कि इसके माध्यम से 1857 की क्रांति के महान योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी गई। इस कहानी में बोधू अहीर का परिचय एक फौजी के रूप में सामने आता है, जो आजमगढ़ में अंग्रेजों की 17वीं बटालियन में तैनात थे। उन्होंने तीन जून, 1857 को क्रांति का विगुल फूंक दिया था। कई अंग्रेजों को मार दिया। उनके होने वाले दामाद माधव सिंह, बेटे राम टहल, भाई शिव वचन, किशन सिंह और दोस्त शाह दिलेर ने भी अंग्रेजों के खिलाफ जंग छेड़ दी। उसी घटनाक्रम से जोड़ते हुए इस नाटक को प्रस्तुत किया गया। नाटक की परिकल्पना और निर्देशन अभिषेक पंडित का रहा। इसे शेषपाल सिंह शेष ने लिखा है।
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इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत दया दृष्टि के चेयरमैन डॉ. बृजेश्वर सिंह ने किया। नाट्य मंचन के बाद उन्होंने अकादमी की नाट्य सर्वेक्षक शैलजा कांत को स्मृति चिह्न भेंट किया। शैलजा कांत ने सभी कलाकारों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। साथ ही दया दृष्टि ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना की।
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