इसलिए बनाई टीम
मैं अकेले काम को और आगे नहीं ले जा सकती थी। इसलिए मैंने ऐसी महिलाओं को चुना जो इस काम में रुचि रखती थीं। कुछ सीखकर आगे बढ़ना चाहती थीं। जैसे-जैसे महिलाएं इस काम में निपुण होती गईं, मेरा काम आसान हो गया। हम एक परिवार की तरह काम करने लगे। काम को विस्तार मिला तो आय भी बढ़ी। सभी को लाभांश मिला तो सबने मन लगाकर मेहनत की। आज साथ की सभी महिलाएं आत्मनिर्भर हो चुकी हैं। परिवार का सहयोग मिलने से यह खुशी दोगुनी हो गई।