बरेली। कोविड-19 संकट के बीच कक्षा 9 से 12 तक के स्कूल सोमवार को खुल गए। यूपी बोर्ड के स्कूलों में उपस्थिति काफ ी कम रही, जबकि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में उपस्थिति अच्छी रही। सैनिटाइजर और थर्मल स्कैनिंग के बाद ही छात्रों को स्कूल में प्रवेश किया गया। छात्रों के चेहरे पर मास्क और हाथ में सैनिटाइजर था। वहीं स्कूलों में प्रवेश के समय इन दो चीजों की जांच की जा रही थी। साथ ही थर्मल स्कैनिंग भी की गई।
सोमवार को सुबह से ही हलचल बढ़ गई थी। शासन के आदेश के बाद नौवीं के बाद से सभी स्कूल खोल दिए गए हैं। सोमवार से स्कूलों का दो पालियों में संचालन करने के आदेश पूर्व में दिए गए थे। इन स्कूलों में सीटिंग प्लान के साथ ही कमरों को सैनिटाइज कराकर बंद करा दिया गया था। प्रधानाचार्यों के अनुसार पहले दिन नौंवी और दसवीं के विद्यार्थियों की उपस्थिति कम रहीं लेकिन 11वीं और इंटरमीडिएट के विद्यार्थी अच्छी संख्या में स्कूल पहुंचे।
‘लंबे समय से आनलाइन कक्षाएं चल रही थीं। पहले दिन स्कूल पहुंची तो अच्छा लगा। उम्मीद करती हूं सब ठीक रहे और इसी तरह ऑफलाइन कक्षाएं चलती रहे।’
- अलीशा, इस्लामियां कॉलेज
‘मास्क और सैनिटाइजर घर से लेकर आना ंअनिवार्य कर दिया गया है। स्कूल गेट पर भी जांच के बाद ही प्रवेश मिला।’
- सदफ, इस्लामियां कॉलेज
’बहुत दिनों बाद स्कूल आना हुआ। अच्छा लगा, काफी दिनों बाद आनलाइन की जगह सीधे कक्षा में बैठकर पढ़ाई की।’
- फायजा, इस्लामियां कॉलेज
‘स्कूल आने की बात ही कुछ और होती है। सोमवार को स्कूल आने पर ऐसा लगा कि पहली दफा पढ़ाई करने जा रहे हैं।’
- तैयबा, इस्लामियां कॉलेज
‘घर से ही मास्क और सैनिटाइजर लाए थे। स्कूल पहुंचने पर भी गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही प्रवेश दिया गया। कोविड नियमों के साथ क्लास चली।’
- तनिष्का गंगवार, डीपीएस
‘लंबे समय बाद स्कूल पहुंचे। बहुत अच्छा भी लगा। क्लास में पहले की तरह नहीं बैठने दिया गया। सब दूर-दूर ही बैठे थे।’
- आयुषी त्रिपाठी, डीपीएस।
‘कई महीने बाद स्कूल पहुंचे। पुराने दोस्तों से भी मिले लेकिन पास-पास बैठने का मौका नहीं मिला। कोविड नियमों से कक्षाएं चलती रहीं।’
- उमरा शमसी, द्रोपदी कन्या कॉलेज
‘मास्क और सैनिटाइजर के साथ स्कूल पहुंचे। स्कूल में गेट पर चेकिंग हुई। घोषणा की गई कि कक्षाओं में सीटिंग प्लान के साथ ही बैठेंगे।’
-सहूफा अंसारी, द्रोपदी कन्या कॉलेज
‘कोविड नियमों के साथ ही स्कूल में पढ़ाई हुई। मास्क और सैनिटाइजर अनिवार्य था। कक्षाओं के संचालन के दौरान भी स्कूल प्रबंधन जांच कर रहा था।’
- स्नेहा शुक्ला, द्रोपदी कन्या कॉलेज
‘पहले दिन संख्या बहुत अच्छी नहीं रही लेकिन कम भी नहीं थी। दो पालियों में होने के कारण संख्या कम लग रही थी।’
- निशा, द्रोपदी कन्या कॉलेज