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बरेली की गल्ला सब्जी मंडी में सेल तीन गुना और दाम बीस फीसदी ज्यादा

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बरेली की श्यामगंज गल्ला मंडी में लोगों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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आम दिनों के मुकाबले तीन गुना ज्यादा खरीदारी कर रहे लोग
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रसोई के सामान और दवाओं के लिए बाजार में मची मारामारी

बरेली। शहर में कोरोना संक्रमित मरीज बढ़ने के बाद लॉक डाउन लंबा खिंच जाने के भय की आशंका में लोग आम दिनों से तीन गुना ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं। लॉक डाउन से पहले किराना, सब्जी और दवा बाजार में रोजाना औसतन 17 करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा था, जो अब 55 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कोरोना संकट के बीच अफरातफरी में लोग रसोई से जुड़े सामान और दवाओं की जरूरत से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं। दुकानदारों ने प्रशासन द्वारा तय रेट लिस्ट को अपने प्रतिष्ठानों पर चस्पा ही नहीं किया है। इसलिए मनमानी कीमतें वसूलने का सिलसिला जारी है।
21 मार्च को रात आठ बजे जनता कर्फ्यू का एलान होते ही बाजारों में खरीदारों की भीड़ लग गई। रातों रात गली मोहल्लों में दुकानें खुलावाकर लोगों ने खरीदारी की। इसके बाद 24 मार्च रात को 14 अप्रैल तक के लॉकडाउन की घोषणा के बाद फिर यही माहौल हो गया। बाजारों में लोग जरूरत का सामान खरीदने को उमड़ पड़े। जो ग्राहक दो चार दिन के लिए राशन खरीदता था, उसने हफ्ते से दस दिन तक का स्टाक जमा कर लिया। यहीं स्थित सब्जियों में भी रही। दवा कारोबार में भी इसीलिए उछाल आ गया। जो मरीज तीन चार दिन की दवा लेता था, उसने 15 दिन और एक महीने तक की दवा खरीद ली। इससे एकाएक बाजार में कारोबार उछल कर सामान्य दिनों से तीन गुना हो गया।
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सामान्य दिनों में औसत कारोबार लॉकडाउन में खरीदारी
किराना 07 24
सब्जी 03 04
दवा 07 20

नमकीन-बिस्कुट उद्योग भी शुरू

बरेली। लॉकडाउन के चलते औद्योगिक क्षेत्र में बंदी चल रही थी। सिर्फ आवश्यक कारखाने ही चलाए जा रहे थे। अब केंद्र सरकार के निर्देश पर नमकीन, ब्रेड, बिस्कुट, रस्क, पेयजल और खाद्य प्रसंस्करण संबंधी उद्योग चलाने की भी अनुमति दे दी गई है। संयुक्त आयुक्त उद्योग आरआर गोयल ने बताया कि जिले भर में 50 से अधिक उद्योग चलना शुरू हो गए हैं। इससे 400 से अधिक श्रमिक काम पर लग गए हैं। उन्होंने बताया कि इन उद्योगों के चालू होने से बाजार में होने वाली विभिन्न वस्तुओं की किल्लत कम होगी और मनमानी कीमतों पर भी अंकुश लगेगा। गोयल ने बताया कि नमकीन, बिस्कुट और रस्क आदि लोगों में अधिक पसंद किया जाता है। ज्यादातर लोगों का सुबह का नाश्ता ही इससे होता है। इसलिए इन औद्योगिक इकाइयों का शुरू होना जरूरी था। इन उद्योगों को शुरू कराने के लिए उद्यमी धर्मेंद्र देवनानी, केके चंदानी आदि ने प्रयास किए।

व्यापारी कलंक न लगने दें: सुरजीत

बरेली। शहर में हो रही काला बाजारी को लेकर जनरल मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सरदार सुरजीत सिंह ने कहा है कि व्यापारी समाज अपने ऊपर कलंक न लगने दे। उन्होंने कहा कि व्यापारी का काम इस समय में सेवा करने का है, न कि कोई कमाई करने का। जब जब देश पर संकट आया है व्यापारियों ने बढ़ चढ़ कर सहयोग किया है। लेकिन इस संकट के समय में कुछ व्यापारियों की शिकायतें लोग कर रहे हैं। उन व्यापारियों से उन्होंने विनती करते हुए कहा है कि चोर बाजारी, जमाखोरी, हेरा फेरी के कलंक से खुद को बचाएं। उन्होंने गुरुवाणी के हवाले यह पंक्तियां भी कहीं कि - सच व्यापार करो व्यापारी, दरगहे निभय खेप तुम्हारी। अंत में यह भी कहा कि व्यापारी सब का होता है उसका कार्य सेवा है। वह नफरत के बीज न बोय न बोने दे।

दुकानदारों ने नहीं चस्पा की रेट लिस्ट.. अब भी बेंच रहे महंगा सामान

बरेली। लॉक डाउन में अफरा-तफरी के बीच खरीदारी का सबसे ज्यादा फायदा मुनाफाखोरों ने उठाया। 25-26 रुपये प्रति किलो बिकने वाला आटा मुनाफाखोरों ने 40 रुपये तक बेच दिया। चीनी भी कहीं-कहीं 50 रुपये प्रति किलो तक बेची गई। गली मोहल्लों में ठेले वालों ने सब्जी के मन माने दाम वसूले। इतना ही नहीं थोक कारोबारी भी मौके को भुनाने में पीछे नहीं रहे। आटा स्टाकिस्ट ने रिटेलरों को मनमाने दरों पर सप्लाई की, इसके चलते खुदरा व्यापारियों ने भी ग्राहकों से अधिक दाम वसूले। गली मोहल्लों में दुकानदार और चक्की वालों ने 35-40 रुपये तक आटा बेचा। 20 रुपये किलो का आलू कहीं 40 तक बिक गया। अमर उजाला ने इस मुनाफाखोरी को उजागर किया, तब कहीं जाकर प्रशासन ने खुदरा कीमतों की सूची जारी की। लेकिन सख्ती न होने की वजह से किसी भी दुकानदार ने इस सूची को अपने प्रतिष्ठान पर चस्पा नहीं किया है। इसलिए कीमतों में कोई गिरावट देखने को नहीं मिल रही।

प्रशासन ने राशन, किराना, फल-सब्जी जैसे आवश्यक वस्तुओें की कीमत निर्धारित दी हैं। फल-सब्जी कीमतें काफी कम हो गई हैं। किराना बाजार में अधिक मूल्य वसूलने की जानकारी मिल रहीं हैं। दुकानदार निर्धारित रेट लिस्ट भी नहीं लगा रहे हैं। प्रशासन इन पर सख्त कार्रवाई करेगा। ठेले वालों को सब्जी मूल्य की सूची दे दी है।

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- अनिल कुमार, मंडी सचिव, मूल्य नियंत्रण प्रभारी

‘सामान्य दिनों की अपेक्षा ग्राहकों ने ज्यादा खरीदारी कर जरूरत का सामान घर में स्टाक कर लिया है। हड़बड़ी में बाजारों में भीड़ बढ़ी। इसका फायदा मुनाफाखोरों ने जमकर उठाया। लॉकडाउन के दौरान खरीदारी तीन-चार गुना तक बढ़ी है। उद्योग व्यापार मंडल मुनाफाखोरी और जमाखोरी के सख्त खिलाफ है। प्रशासन द्वारा तय रेट लिस्ट से ग्राहकों से कीमत ली जाना चाहिए।’
- राजेंद्र गुप्ता, व्यापारी नेता


 
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