'कानून से चलेगा देश'
सवाल उठाते हुए कहा कि मुस्लिमों को इससे नाराजगी थी तो उन्होंने पत्थरबाजी क्यों की? वे अपने पक्ष या सांसद से कह सकते थे कि उन्हें कोर्ट पर भरोसा नहीं। छह महीने प्रक्रिया चल रही थी। विरोध करना था तो पार्टी का गिरेबां पकड़ते कि वे कोर्ट क्यों गए? पत्थर बरसाने, हिंसा करने की क्या जरूरत थी? हिंदुस्तान दंगों से नहीं कानून से चलेगा। संभल हिंसा में पांच लोग मर गए हैं। कहा कि कोर्ट पसंद नहीं था तो वहां (कोर्ट) क्यों गए? सर्वे क्यों माना? सर्वे का समय निर्धारित कर ज्वाइंट कमेटी क्यों बनाई?
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सपा सांसद पर बरसे
डॉ. इंद्रेश ने संभल के सांसद जिया उर रहमान बर्क पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इतनी समझ नहीं थी कि कानून के दायरे में सब चल रहा था। उन्होंने मुस्लिमों को भड़काकर शैतान के रास्ते पर डाला। उनका काम था कि इंसान के रास्ते पर चलने के लिए कहें। बायकॉट कर देते। एक तरफ बर्क कानून पर भरोसा करते हैं, दूसरी तरफ दंगा कराएं। यह कौन सी इंसानियत है? पत्थर मारने थे तो कमेटी और अपने नेताओं को मारते।