बरेली। ट्रैफिक की बढ़ती दिक्कत को देखते हुए करीब तीन साल पहले बनाए गए रिंग रोड के ठंडे पड़े प्रोजेक्ट को एक बार फिर ऑक्सीजन मिल गई है। तीन दिवसीय दौरे पर आए खादी ग्रामोद्योग के अपर मुख्य सचिव और नोडल अफसर नवनीत सहगल के सामने जनप्रतिनिधियों ने करीब 41 किलोमीटर के प्रस्तावित रिंग रोड मामला उठाया था। इस प्रोजेक्ट की फाइल लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के पास रुकी हुई है। अफसरों ने अब इस प्रोजेक्ट फिर से नए सिरे से कसरत करनी शुरू कर दी है।
करीब 40 किलोमीटर लंबी रिंगरोड फोरलेन सड़क निर्माण का प्रस्ताव राज्य सरकार को काफी पहले भेजा गया था। इसके तहत बड़ा बाईपास बनने के बाद शहर के दक्षिण की ओर एक और बाईपास बनने से बरेली के चारों ओर रिंग रोड बनाया जाना प्रस्तावित था। एनएच-24 के बरेली-बीसलपुर मार्ग की क्रासिंग पर फ्लाईओवर निर्माण और राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित सेटेलाइट बस अड्डे से हवाई अड्डा होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-74 तक सड़क को फोरलेन करने का प्रस्ताव भी मंजूर कर लिया गया था। इसी कड़ी में सेटेलाइट पर फ्लाईओवर, किला ओवरब्रिज के बराबर में टू लेन ओवरब्रिज, चौपुला ओवरब्रिज को वाईशेप में बनाने समेत बरेली के अन्य प्रोजेक्ट भी जल्द ही स्वीकृत हैं। इसके अलावा शाहजहांपुर बाईपास से बदायूं के बीच बुुखारा होते हुए सड़क का निर्माण होना था। हालांकि बाद में दिक्कत यह आई कि पीडब्ल्यूडी ने रिंग रोड के प्रोजेक्ट की जो लागत रखी थी, वह काफी ज्यादा था। साथ ही साथ ही शाहजहांपुर बाईपास और चौबारी के बीच रोड चौड़ीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण भी अड़ंगा बन गया था। अब प्रभारी मंत्री नवनीत सहगल के सामने सांसद धर्मेंद्र कश्यप सहित कई जनप्रतिनिधियों के मामला उठाने के बाद इस प्रोजेक्ट को फिर से हवा मिल गई है।
‘रिंग रोड को लेकर नोडल अफसर नवनीत सहगल की मीटिंग के मिनट्स आने बाकी है। उसमें रिंग रोड को लेकर जो भी बिंदु होंगे, उसके आधार पर नए सिरे से प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।’
-पीके बांगड़ी, एक्सईएन, निर्माण खंड भवन