बरेली/बिथरी चैनपुर। बीडीए के खिलाफ बुधवार को भी बिचपुरी गांव के लोग गंगा देवी का शव रखकर प्रदर्शन करते रहे लेकिन कोई अफसर मौके पर नहीं पहुंचा। शाम को गंगा देवी के परिवार वालों ने लोगों पर राजनीति करने का आरोप लगाया तो पुलिस ने सख्ती करके गंगा देवी का शव धरनास्थल से उठवाकर उनके बेटे भूरे और हरिशंकर को सौंप दिया।
रामगंगानगर आवासीय योजना में शामिल बिचपुरी गांव में तीन मार्च को बीडीए ने करीब दस मकानों को जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाया जाना बताकर ध्वस्त कर दिया था। अफसरों का कहना था कि अभी वहां कई अन्य मकान भी बीडीए के निशाने पर हैं। इससे आक्रोशित गांव वाले तीन मार्च से ही गांव में बीडीए के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। रात-दिन चल रहे इस धरना-प्रदर्शन में शामिल 65 वर्षीय गंगा देवी की सोमवार रात मौत हो गई।
गांव वालों ने बीडीए की कार्रवाई की दहशत से गंगा देवी की मौत होने का आरोप लगाकर मंगलवार सुबह चौराहे पर शव रखकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन वे बीडीए के अफसरों को बुलाने की जिद पर अड़े रहे और यह मांग करते रहे कि बीडीए यह लिखकर दे, अब उनके मकान नहीं तोड़े जाएंगे। मगर न तो बीडीए का कोई अफसर मौके पर पहुंचा और न ही कोई आश्वासन दिया गया। इस वजह से गंगा देवी का शव रखकर बुधवार को भी वहां प्रदर्शन जारी रहा।
कई थानों की पुलिस रही तैनात
गांव वालों के गुस्से को देखते हुए मंगलवार से ही बिचपुरी में बिथरी के अलावा भुता, हाफिजगंज और फरीदपुर थाने की पुलिस तैनात थी। मगर गांव वाले लगातार बीडीए अफसरों को बुलाने पर अड़े थे। बुधवार शाम को गंगा देवी के परिजन ने गांव के कुछ लोगों पर राजनीति के चलते उनका शव धरनास्थल पर रखने का आरोप लगाकर पुलिस से शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाकर उनका शव परिवार वालों को दिला दिया। मगर गांव वालों का धरना प्रदर्शन अब भी जारी है।