ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए 40 हजार रुपये मांगने पर पारस गुप्ता के खिलाफ दर्ज हुई थी एफआईआर
विज्ञापन
प्रेमनगर से हटाकर क्राइम ब्रांच को दी थी विवेचना, अब लगा दी फाइनल रिपोर्ट
बरेली। जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में लगे कोरोना पीड़ित के परिजन से ऑक्सीजन सिलिंडर के बदले 40 हजार रुपये मांगने के आरोपी पारस गुप्ता को क्राइम ब्रांच ने क्लीन चिट दे दी है। हालांकि जब रिपोर्ट दर्ज हुई थी तब पुलिस उसे अपराधी मानकर उसकी तलाश में जुटी रही। लगातार दबिशें भी दी गईं। कास बात तो यह है कि जिल ऑडियो क्लिप को साक्ष्य मानकर पारस के खिलाफ औषधि विभाग की निरीक्षक ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, पुलिस अब उसे साक्ष्य मानने को तैयार नहीं है।
कोरोना काल में ऑक्सीजन की मारामारी मची थी। कई लोगों ने ऑक्सीजन की कमी के चलते दम तोड़ दिया था। उसी दौरान राजेंद्रनगर निवासी पारस गुप्ता का एक ऑडियो वायरल हुआ था। इसमें ऑक्सीजन सिलिंडर मुहैया कराने के बदले वह 40 हजार रुपये की मांग कर रहा था। जिस दिन ऑडियो वायरल हुआ, उसी दिन पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को पत्र देकर ऑक्सीजन सिलिंडर और दवाओं की कालाबाजारी की शिकायत की थी। इससे औषधि विभाग हरकत में आया और तत्कालीन औषधि निरीक्षक उर्मिला वर्मा ने नौ मई को थाना प्रेमनगर में पारस गुप्ता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी।
रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद प्रेमनगर पुलिस ने पारस गुप्ता को गिरफ्तार नहीं किया। मामला लगातार मीडिया की सुर्खियों में रहा। इस पर 23 मई को एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने जांच क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी। इसके बाद पारस गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए दबिशें दी जाने लगीं, लेकिन वह हाथ नहीं आया। इसी बीच पारस कोर्ट चला गया और अंतरिम जमानत ले आया। दस अगस्त को क्राइम ब्रांच ने इस मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि 40 हजार रुपये में सिलिंडर बेचने के न तो साक्ष्य मिले हैं और न ही कोई गवाह मिला है।
ऑक्सीजन सिलिंडर के बदले किसी भी व्यक्ति से 40 हजार रुपये वसूलने के सबूत नहीं मिले हैं। जिस व्यक्ति की ऑडियो थी, उसके पास भी इसका कोई सबूत नहीं था। इसी वजह से मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाई गई है। - सुशील कुमार, एसपी क्राइम