बरेली। रक्षाबंधन के दूसरे दिन भी शहर के दोनों रोडवेज बस अड्डों पर खासी भीड़ रही। बसों की कमी के चलते भाइयों के घर से राखी बांधकर लौट रहीं बहनों को गंतव्य की बस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। बस अड्डों पर हेल्पलाइन काउंटर समेत अन्य व्यवस्थाओं का भी अभाव दिखा।
रक्षाबंधन के अगले दिन भारी भीड़ उमड़ने की संभावना के बावजूद परिवहन निगम प्रबंधन ने कोई व्यवस्था नहीं की। रूटों पर यात्रियों की संख्या के हिसाब से बसों की व्यवस्था करने में रुहेलखंड और बरेली डिपो के अधिकारी नाकाम रहे। बस अड्डों पर यात्री बसों के इंतजार में घंटों भटकते रहे, लेकिन राजकीय अवकाश होने की वजह से निगम के अधिकारी घरों से नहीं निकले। पहले से कोई प्लानिंग न होने की वजह से स्टेशन इंचार्ज भी बसें उपलब्ध नहीं करा सके। दोपहर दो बजे के समय पुराने रोडवेज बस अड्डे पर आलम यह था कि जिस रूट के लिए बसें लगीं थीं, उनमें सवारी नहीं थीं, जबकि बदायूं, आगरा, मथुरा जाने वाले यात्रियों की भीड़ जमा थी, लेकिन कोई बस नहीं थी। बस के इंतजार में खड़े बदायूं के महेंद्र जायसवाल ने बताया सुबह नौ बजे से बस का इंतजार कर रहे हैं।
सैनिटाइजेशन के दावे फेल
रक्षाबंधन पर उमड़ी भारी भीड़ से कोरोना गाइडलाइन की भी जम कर धज्जियां उड़ीं। रोडवेज प्रबंधन ने संक्रमण से बचाव के लिए सीटिंग क्षमता से ही सवारियां बैठाने और बिना मास्क वाले यात्रियों को यात्रा न करने देने के निर्देश दिए थे, लेकिन इनका पालन नहीं हो सका। यात्रियों की तो छोड़िए, बसों के कंडक्टर और ड्राइवर भी मास्क नहीं लगाए थे। बसों का सैनिटाइजेशन भी नहीं हुआ। एक रूट से लौटते ही बसों को तुरंत दूसरे रूट पर रवाना कर दिया गया। इससे बसें सैनिटाइजेशन के लिए वर्कशॉप ही नहीं पहुंच पाईं।