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जान ले रहा है रैबीज मगर पीएचसी पर एआरवी नहीं

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बरेली। करीब माह भर में कुत्ते और सियार के काटे जाने के बाद रैबीज की चपेट में आए तीन लोगों की मौत के मामले सामने आए हैं मगर इस जानलेवा बीमारी से लोगों को बचाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी रैबीज वैक्सीन ही नहीं है। कुत्ते और रैबीज फैलाने वाले दूसरे आवारा जानवरों के काटे जाने के बाद पीएचसी पहुंचने वाले लोगों को एआरवी लगवाने के लिए सीएचसी रेफर किया जा रहा है।
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स्वास्थ्य केंद्रों की पड़ताल के लिए अमर उजाला की टीम ने दलेलनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पड़ताल की। केंद्र पर चिकित्सक समेत 12 कर्मचारी तैनात मिले। अस्पताल में वायरल बीमारियों के साथ छिटपुट चोट लगने पर पीड़ितों के लिए प्राथमिक इलाज की व्यवस्थाएं मिलीं। मगर पता चला कि गंभीर हादसे की चपेट में आने या अन्य किसी गंभीर बीमारी से हालत बिगड़ने पर मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। शनिवार को पीएचसी दलेलनगर की ओपीडी में 137 मरीज इलाज को पहुंचे थे। तीन मरीजों को भर्ती किया गया। ज्यादातर वायरल से पीड़ित थे, जिन्हें दवाएं दी गईं।
पीएचसी प्रभारी डॉ. मुदीस के मुताबिक अस्पताल में खून और बलगम संबंधी दस प्रकार की जांच हो रही हैं। इनमें एचआईवी, एचडीवी, मलेरिया, कोरोना, एंटीजन आदि शामिल हैं। अस्पताल में कोरोना महामारी को देखते हुए आठ बेड का कोविड वार्ड भी बनाया गया है। एआरवी न होने की वजह से अगर कुत्ता काटने का अगर कोई पीड़ित स्वास्थ्य केंद्र पहुंच रहा है तो उसे क्योलड़िया सीएचसी पर रेफर किया जा रहा है।
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