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Bareilly News: मौलाना 2010 के दंगों का मास्टरमाइंड, चार्जशीट में पुलिस ने शामिल नहीं किया था नाम

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बरेली। आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां वर्ष 2010 के दंगों का मास्टरमाइंड है, लेकिन पुलिस ने चार्जशीट में उसका नाम शामिल नहीं किया। बाद में इस मामले की सुनवाई कर रहे अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने गवाहों के बयानों के आधार पर मौलाना तौकीर रजा खां को आरोपी मानते हुए पांच मार्च 2024 को समन जारी कर 11 मार्च 2024 को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया था।
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मौलाना तौकीर रजा कोर्ट में पेश नहीं हुए तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। इसके बाद उनको भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई थी। अप्रैल 2024 खत्म होते-होते मौलाना के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई। पुलिस ने मौलाना के दो करीबियों बानखाना निवासी आरिफ और भोजीपुरा के पिपरिया निवासी अबरार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए मौलाना तौकीर रजा के सौदागरान स्थित आवास के साथ ही बानखाना निवासी वसीम के घर पर कुर्की का नोटिस चस्पा किया गया था।
इस दौरान 20 अप्रैल 2024 को होने वाली सुनवाई से पहले मौलाना को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई।मामला जिला जज की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। इस मामले में फिलहाल सुनवाई चल रही है।
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गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद कई दिन मोबाइल बंद कर रहे भूमिगत
वर्ष 2010 के दंगों के मामले में गैर जमानती वारंट जारी करते हुए कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया था कि मौलाना को 13 मार्च को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करे। तब मोबाइल फोन बंद कर मौलाना भूमिगत हो गए थे। पुलिस ने दिल्ली, लखनऊ तक की दौड़ लगाई, लेकिन मौलाना को न तो पकड़ सकी, न ही समन तामील करा सकी। इस पर कोर्ट ने पुलिस को फटकार भी लगाई थी। इंस्पेक्टर प्रेमनगर को मौलाना का मददगार भी बताया था।
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