फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चाय पर चर्चा: बरेली के लोगों ने उठाया शिक्षा और रोजगार का मुद्दा, कानून व्यवस्था को सराहा; देखें वीडियो

Sat, 06 Apr 2024 09:13 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

अमर उजाला का चुनावी रथ सत्ता का संग्राम शनिवार को उत्तर प्रदेश के बरेली में पहुंचा। इस बार लोकसभा चुनाव को लेकर बरेली की जनता का क्या मिजाज है, स्थानीय मुद्दे क्या हैं, चाय पर चर्चा कर यह जानने का प्रयास किया गया। चर्चा के दौरान शहर के लोगों ने बेबाकी से अपनी राय रखी। 
विज्ञापन
चाय पर चर्चा में लोगों ने गिनाए चुनावी मुद्दे - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश के बरेली को प्राचीन नाथ मंदिरों से आच्छादित होने के कारण नाथ नगरी भी कहा जाता है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां से भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। भाजपा ने इस बार संतोष गंगवार का टिकट काटकर छत्रपाल सिंह गंगवार को प्रत्याशी बनाया है। वहीं सपा से पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन चुनाव लड़ रहे हैं। बसपा ने छोटेलाल गंगवार को टिकट दिया है। 

विज्ञापन


बरेली के मतदाता और खासकर युवा सरकार और अपने लोकसभा क्षेत्र के उम्मीदवारों के बारे में क्या सोचते हैं, उनके क्या मुद्दे और आकांक्षाएं हैं, मतदाताओं के मुद्दों पर नेताओं और उम्मीदवारों का क्या कहना है, वे किन मुद्दों को लेकर चुनाव में उतरे हैं? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' शनिवार को बरेली में पहुंचा। सुबह चाय पर चर्चा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सिविल लाइंस में बिशप इंटर कॉलेज के सामने ओम टी स्टॉल पर चाय पर चर्चा के दौरान शहर के लोगों ने बेबाकी से अपनी राय रखी। किसी ने कानून व्यवस्था को बेहतर बताया तो किसी ने महंगी शिक्षा और रोजगार के मुद्दे के उठाया। 

हनीफ ने रोजगार के मुद्दे को उठाया। कहा कि बरेली में रोजगार को लेकर कोई काम नहीं हुआ है। आदमी बेरोजगार रहेगा तो देश तरक्की नहीं कर सकता। राम या अल्लाह के नाम किसी का पेट नहीं भरता है। युवाओं को नौकरियां चाहिए, जो मिल नहीं रहीं। मोहम्मद रहमान ने भी महंगी शिक्षा का मुद्दा उठाया। कहा कि स्कूलों ने फीस दोगुनी कर दी है। आदमी के पास पैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि बरेली में एम्स होना चाहिए और हाईकोर्ट की बेंच होना चाहिए। ताकि यहां के लोगों की दौड़ बच सके। 
विज्ञापन



शिक्षा और रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा
अरुण गौतम ने कहा कि बरेली में मुद्दे ही मुद्दे हैं। बेरोजगारी बढ़ी है। विकास का काम नहीं हुआ है। आम जनता के साथ-साथ सरकारी कर्मचारी भी परेशान हैं। एनकाउंटरों से लोगों को मुद्दों से भटकाया जा रहा है। रोजगारपरक शिक्षा दी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। शिक्षा का बाजारीकरण हो गया है, जिससे शिक्षा महंगी हो गई है। बेरोजगारी में बच्चों को कैसे पढ़ाया जाए। फीस और किताबें महंगी हो गई हैं। इस पर सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया है। जबकि शिक्षा और रोजगार बहुत बड़ा मुद्दा है। ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग हो रहा है। 

अफसरशाही पर लगे लगाम 
अशोक कुमार सिंह ने कहा कि बरेली में विकास बहुत कम हुआ है। उम्मीद है कि आने वाले समय विकास होगा। भ्रष्टाचार तो है, इसके खिलाफ आम आदमी को आगे बढ़ना होगा। कुछ जगह भ्रष्टाचार कम हुआ तो कई जगह बढ़ा है। एनकाउंटर से माफिया अपराधी डर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में माफियागीरी कम हुई है। कानून व्यवस्था मजबूत हुई है। वहीं, सरकार का अफसरशाही पर नियंत्रण नहीं है। उस पर नियंत्रण की जरूरत है ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके। सबको रोजगार मिलना चाहिए। बरेली में उद्योग लगाए जाने चाहिए, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। 

राकेश कुमार ने एनकाउंटर को सही ठहराते हुए कहा कि अपराधी के अंदर कानून का भय होना बहुत जरूरी है। रोजगार बड़ा मुद्दा बताया। कहा कि पढ़ाई आम आदमी के बस से बाहर हो गई है। बरेली को एम्स की जरूरत है। शहर का विकास तभी होता है, जब आम आदमी के पास पैसा होता है। 
विज्ञापन

व्यापारियों ने सरकार के कार्यों को सराहा 
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महानगर उपाध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय मुद्दों से ही सबकुछ जुड़ा हुआ है। बरेली में विकास की कमी नहीं है। शहर का सौंदर्याकरण हुआ है। निजी स्कूली की मनमानी होती है, लेकिन शिक्षा में सुधार के लिए सरकार प्रयास कर रही है। उज्जवला और राशन वितरण योजना का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की ओर से कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। पुल रोड बन रहे हैं। धीरे धीरे विकास हो रहा है और विकास होगा तो जनता को थोड़ी तो परेशानी होगी। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष विकास अग्रवाल ने कहा कि इस चुनाव में कोई मुद्दा नहीं है। हर आदमी सिर्फ मोदी की तरफ देख रहा है। केवल योगी और मोदी के ऊपर चुनाव चल रहा है। 

इस विशेष कवरेज को आप यहां देख सकेंगे
amarujala.com अमर उजाला के यूट्यूब चैनल और फेसबुक चैनल पर आप ''सत्ता का संग्राम'' से जुड़े कार्यक्रम और चर्चा लाइव देख सकेंगे। ''सता का संग्राम'' से जुड़ा व्यापक जमीनी कवरेज आप अमर उजाला अखबार में भी पढ़ सकेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें