नरियावल मंडी परिसर में देर रात तक बरेली-मुरादाबाद एमएलसी स्नातक चुनाव में भाजपा के जयपाल सिंह व्यस्त रिकार्ड वोट से जीत गए। उन्होंने सपा की रेनू मिश्रा को 23973 वोटों से पराजित किया है। 6347 वोट पाकर कांग्रेस के कुमुद गंगवार तीसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में सबसे अधिक 6183 वोट निरस्त हो गए, जबकि 46 वोट नोटा में डाले गए।
आज सुबह तक हुई गणना में भाजपा के जयपाल सिंह को 39063 वोट मिले, जबकि सपा की रेनू मिश्रा को 15090 वोट मिले हैं। कांग्रेस के कुुमद गंगवार को 6347 वोट ही मिले। एमएलसी चुनाव के अब तक के इतिहास में पहली बार पहले चक्र में भाजपा प्रत्याशी को विजयी घोषित किया है। जबकि पिछले चुनावों में इस वारीयता के चुनाव में आखिरी चक्र तक मतों की गणना के बाद ही परिणाम घोषित होता था। क्योंकि 50 फीसदी से अधिक मत मिलने पर पहले राउंड की गणना में परिणाम घोषित हो जाता है। आधे से कम वोट होने पर आखिरी वारीयता क्रम के वोटों की गिनती करने का प्रावधान है।
किसको कितने वोट मिले
प्रत्याशी पार्टी वोट
कुमुद गंगवार कांग्रेस 6347
जयपाल सिंह व्यस्त भाजपा 39063
रेनू मिश्रा सपा 15090
अनिल कुमार मिश्रा निर्दल 00717
अनीस अहमद निर्दल 00341
आरिफ मोहम्मद पाशा निर्दल 00368
आसिफ अली उस्मानी निर्दल 01353
रोमी सागर निर्दल 02365
सुमन उपाध्याय निर्दल 00344
सुरभि निर्दल 00945
हिंमांशू यादव निर्दल 00069
नोटा निर्दल 00046
कुल वैध मत ---- 67048
निरस्त ----- 06183
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कुल वोट 73231
छह हजार से अधिक पढ़े लिखों के वोट निरस्त
इसे दुर्भाग्य कहें या फिर विधान परिषद स्नातक चुनाव में स्नातक मतदताओं के बीच मतदान के प्रशिक्षण का अभाव। यह पहली बार है कि एमएलसी के चुनाव में सर्वाधिक 8.44 फीसदी वोट निरस्त हुए हैं। पढ़े लिखे इन मतदाताओं को यह जानकारी भी नहीं थी कि उन्हें किस तरह से वोट देना है। यदि यह वोटर सामान्य चुनाव के साक्षर या कम पढ़े लिखे होते तो बात अलग थी। सामान्य चुनाव में भी पहले कभी भी इतने वोट निरस्त नहीं हुए।
एमएलसी चुनाव में चुनाव चिन्ह नहीं होता। उनके नाम के आगे मतदाताओं को प्रथम, द्वितीय या तृतीय वारीयता अंकों में लिखनी होती है। लेकिन 79321 वोटों में से 6183 ऐसे वोट रहे, जिनको सही से वोट न डालने के कारण गणना के दौरान निर्वाचन अधिकारी ने निरस्त कर दिया।
इन मतों को निरस्त करने के लिए निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी निभा रहे कमिश्नर प्रमांशु कुमार को सहायक निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी निभा रहे अपर आयुक्त प्रशासन, बरेली के डीएम सुरेंद्र सिंह और पीलीभीत के डीएम मासूम अली सरबर की मदद ली गई। इन अधिकारियों को निरस्त मतों पर टिप्पणी अंकित करने के साथ-साथ 6183 मतपत्रों पर हस्ताक्षर करने पड़े। इस चुनाव में निरस्त हुए मतों से साफ हो चुका है कि हर बार चुनाव में साक्षर हो या फिर स्नातक पढ़े हुए सभी को समान रूप से वोट डालने के लिए प्रशिक्षण के लिए चुनाव आयोग को अभियान चलाना होगा।
‘इस बार चुनाव में अधिक मतों के निरस्त होने के कारण काफी परेशानी हुई है। सरकारी तंत्र के अलावा प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों को भी भविष्य में चुनाव के दौरान मतदाताओं को ठीक से वोट डालने के लिए जागरुक करने का अभियान चलाना चाहिए।’ सुरेंद्र सिंह, जिलाधिकारी
‘व्यस्त’ ने रचा इतिहास
एमएलसी चुनाव में जयपाल सिंह व्यस्त ने सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का रिकार्ड भी बनाया है। हालांकि नौ जिलों के मतदाताओं में से बरेली की ज्यादा भूमिका नहीं रही है। यहां अन्य जिलों की तुलना में कम वोट थे और कम लोगों ने ही वोट डाले। इसके बावजूद भाजपा की रिकार्ड जीत हुई है। पूर्व में इस सीट से नेपाल सिंह जीतते रहे हैं। उनके सांसद बनने के बाद उप चुनाव में जयपाल सिंह व्यस्त इस सीट पर एमएलसी बने थे।