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हिंदी हैं हमः सिर्फ भाषा नहीं बल्कि संस्कृति भी है हिंदी

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demo photo - फोटो : Amar Ujala
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शिक्षकों ने कहा- हिंदी बोलने वालों को प्रोत्साहित करने की शुरू हो परंपरा, पाठ्यक्रम भी हिंदी में हो

बरेली। ‘अंग्रेजी शासन से स्वतंत्र हुए देश में हिंदी बोलने वाले पिछड़ गए और अंग्रेजी के पिछलग्गू बनने वाले आगे बढ़ते गए। इस परतंत्रता के बोध से आजाद होने के लिए लोगों को अपनी भाषा के प्रति समर्पित होना होगा। उन्हें समझना होगा कि हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं बल्कि हमारी संस्कृति है।
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शिक्षकों के अनुसार सभी भाषाओं का ज्ञान होना आवश्यक है परंतु उसे अपनाने के फेर में अपनी मातृभाषा का अपमान उचित नहीं माना जा सकता। हिंदी या संस्कृत बोलने वालों को उपेक्षित किया जाता है। अंग्र्रेजी के कुछ शब्द बोलकर लोग खुश होते हैं, हालांकि यह सिर्फ अज्ञानता का पर्याय है। जो व्यक्ति अपनी भाषा के प्रति समर्पित नहीं है, उसे मातृभूमि की चिंता कितनी होगी, इसका आकलन सहज ही किया जा सकता है। हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए बचपन से ही बच्चों को हिंदी बोलने वालों का सम्मान करने की आदत डालनी चाहिए। ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो।
शिक्षकों का कहना है कि बच्चों को हिंदी से पहले पाठ्यपुस्तक में अंग्रेजी के शब्द सिखाए और पढ़ाए जाते हैं। फिर हिंदी का अध्ययन कराते हैं। परिणाम यह होता है कि बच्चे हिंदी में भले ही बात करें लेकिन उनकी प्राथमिकता अंग्रेजी ही रहती है। पिछले सालों में हिंदी विषय की परीक्षा में बच्चों के अनुत्तीर्ण होने के मामले इसका उदाहरण है। अभिभावकों को समझना होगा कि ज्ञान और संस्कृति दोनों अलग हैं।

हिंदी न केवल एक भाषा है बल्कि हिंदी अपने आप में पूरी संस्कृति है। इसके विकास के लिए आवश्यक है कि हम इस पर गर्व करें। बच्चों को हिंदी साहित्य और मूल्यों से अवगत कराना जरूरी है। उन्हें सही हिंदी लिखना-बोलना सिखाएं और बेहतर हिंदी बोलने पर प्रोत्साहित करें। - डॉ. वंदना शर्मा, चीफ प्रॉक्टर बरेली कॉलेज

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बेसिक शिक्षा हिंदी में ही दी जानी चाहिए। ज्ञानार्जन के लिए अंग्रेजी, उर्दू आदि भाषाएं हो सकती हैं। मेरा अनुभव है कि मातृभाषा में बच्चे बेहतर तरीके से पढ़ने और समझने लगते हैं। बोर्ड कोई भी हो लेकिन उसमें हिंदी विषय की पढ़ाई अनिवार्य तौर पर शामिल की जानी चाहिए। तभी हिंदी मातृभाषा से राष्ट्रभाषा बनेगी। - हरीश बाबू शर्मा, शिक्षक नेता

राष्ट्र के विकास की नींव और सर्वांगीण विकास की कल्पना भाषा के जरिए ही शुरू होती है। हिंदी का विकास करना सिर्फ एक वर्ग का दायित्व नहीं बल्कि यह जनमानस का सामूहिक प्रयास होना चाहिए। भाषा का सही प्रयोग, उच्चारण, शब्दों का चयन, शिक्षण में भाषा का समुचित संकलन, साहित्य में हिंदी भाषा को प्रमुखता मिलनी चाहिए। - अजय आनंद, प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय

हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए बच्चों को बचपन से संस्कारवान बनाना होगा। उन्हें अंग्र्रेजियत वाले स्कूल से दूर रखना होगा क्योंकि कॉन्वेंट स्कूल हिंदी भाषा का मजाक बनाकर बच्चों को अंग्रेजी के प्रति ज्यादा सतर्क करते हैं। सरकार को भी हिंदी भाषा के विकास पर जोर देना चाहिए। नई-नई योजनाएं चलाकर इसे आगे बढ़ना चाहिए। - अवनींद्र, संयुक्त महासचिव बेसिक शिक्षा कल्याण समिति

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