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विदेशी कोच नहीं पचा पा रहे फुटबॉलर

Mon, 11 Apr 2016 01:38 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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देश में फुटबॉल की स्थिति लगातार खराब हो रही है। फीका की रैकिंग में भी हम 169 वें नंबर पर पहुंच चुके हैं। इसकी वजह खिलाड़ी और विदेशी कोच के बीच सामंजस्य न होना है। यह कहना है अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के फुटबालरों का। रविवार को वरिष्ठ खिलाड़ियों का जमावड़ा बरेली में हुआ। ये सभी फुटबाल की वर्तमान दशा और दिशा पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए।
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साई सेंटर लखनऊ के चीफ कोच और यूपी सॉकर फुटबॉल फेडरेशन के सदस्य सैय्यद फरमान हैदर ने कहा कि विदेश में 17 वर्ष की उम्र में खिलाड़ी विश्व कप खेलता है और हमारे यहां 18 वर्ष में जूनियर खेलने लायक भी नहीं हो पाता। इसकी वजा है, भारतीयों की क्षमता और माहौल में भिन्नता। हमारे यहां भारतीय कोच से ज्यादा विदेशी कोच को तरजीह दी जाती है। जब कि भारतीय फुटबॉलरों को वह समझ ही नहीं पाते हैं। यह मुद्दा हर साल उठा है। उन्होंने बताया कि 1966 में एशियन चैंपियनशिप भारत ने जीती। 1950 के ओलंपिक में हम चौथे स्थान पर रहें जब कि आज हमारी हालत बहुत खराब हो चुकी है। यदि विदेशी कोच से फुटबॉल सिखाना है तो नर्सरी तैयार करें। यूपी फुटबॉल टीम मूल्यांकन समिति के सदस्य आरडी पॉल ने कहा कि सीनियर ग्रुप को विदेशी कोच मिल रहे हैं जो सिर्फ टीम को पॉलिश करते हैं लेकिन यह पॉलिश चमक नहीं रही। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि साउथ एशियन गेम्स (सैग) में भारत नेपाल से हार गया। बरेली स्पोर्ट्स स्टेडियम में सबसे पहले फुटबॉल कोच और 1977 में सुब्रतो कप जीतने वाली टीम के सदस्य रहे शहनवाज खान बताते हैं कि जब तक खेलों में गैर खिलाड़ियों का हस्तक्षेप बंद नहीं होगा तब तक स्थिति नहीं सुधरेगी। 

हास्टल के दिनों को भी याद किया 
व्हाट्सएप का असली उपयोग तो फुटबॉल खिलाड़ियों ने किया। बरेली हॉस्टल के खिलाड़ी बिछड़ चुके थे। इन्हीं में से एक दीपक सचदेवा ने ग्रुप बनाया और एक- एक कर सौ लोगाें को जोड़ लिया। सभी खिलाड़ी एक दूसरे से मिले तो फिर मस्ती शुरू हो गई। प्लान बना कि बरेली में ही सब लोग मिलेंगे। यह जिम्मेदारी आरएसओ एके पांडेय ने संभाली। दो दिन के वीकेंड पर सबने खुलकर मस्ती की। फुटबॉल मैच खेलने के साथ हंसी ठिठोली कर हास्टल के दिनों को भी याद किया गया। इस आयोजन में दीप सचदेवा, गणेश सिंह, राणा अनवर, मुश्ताक अली, एके पांडेय और मून रॉबिंसन का विशेष सहयोग रहा। 
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