अफसरों की दौड़भाग अगर थमी नहीं तो चंद महीनों बाद पुल पर पब्लिक भरेगी फर्राटा
एनओसी के बजाय अब वर्किंग ऑर्डर लेकर निर्माण शुरू करने की तैयारी
केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के निर्देश पर हालात देखने पहुंचे सेतु निगम अफसर
बरेली। अफसर अगर इस बार भी दिखावे के तौर पर कुछ दिनों की भागदौड़ करके पिछली कई बार की तरह शांत न बैठे तो हो सकता है कि लालफाटक ओवरब्रिज के रास्ते से कैंट बोर्ड की जमीन पर निर्माण की अनुमति का कांटा दूर हो जाए। तीन साल से हवा में लटके इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अब वर्किंग ऑर्डर लेने की तैयारी शुरू की गई है। विभागीय अफसर दावा भी कर रहे हैं कि सेना मुख्यालय से जल्द ही वर्किंग ऑर्डर मिल सकता है। इसके बाद चंद महीनों में ही लालफाटक ओवरब्रिज बनकर तैयार हो जाएगा।
लालफाटक ओवरब्रिज के एक हिस्से का निर्माण कैंट बोर्ड की जमीन पर होना है। कैंट बोर्ड ने पहले इसके बदले में दूसरी जमीन मांगी थी लेकिन प्रशासन इतनी ही कीमत की दूसरी जमीन नहीं दे पाया लिहाजा यह मामला तीन सालों से लटका हुआ है। इस बीच कई और विकल्प पर विचार हुआ लेकिन बात नहीं बन पाई। क्रॉसिंग के ऊपर रेलवे के निर्माण के साथ दूसरे छोर पर सेना की जमीन पर पुल न बन पाने से प्रोजेक्ट काफी समय से अधूरा पड़ा है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने रक्षा मंत्री के साथ मंत्रालय के अफसरों से भी मुलाकात कर इस प्रकरण पर बातचीत की थी। इसके बाद एक अरसे से ठंडे पड़े इस मामले में हाल ही में कार्रवाई आगे बढ़ी।
करीब पांच महीने पहले प्रमुख सचिव लोकनिर्माण विभाग ने भी सेना मुख्यालय को एनओसी के लिए पत्र लिखा। इसमें कहा गया था कि कैंट बोर्ड की शर्तों की वजह से लालफाटक प्रोजेक्ट फंसा हुआ है और इस वजह से पब्लिक को काफी दिक्कत हो रही है। प्रमुख सचिव ने ये शर्तें पूरी होने तक वर्किंग ऑर्डर देकर काम शुरू करा देने का प्रस्ताव रखा था जिस पर सेना मुख्यालय ने सकारात्मक रवैया दिखाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। हाल ही में सेना मुख्यालय ने वांछित भूमि का मूल्यांकन करने के आदेश जारी कर दिए। उम्मीद जताई जा रही है कि कैंट बोर्ड की जमीन पर निर्माण के लिए जल्द ही वर्किंग ऑर्डर मिल सकता है। इस बीच बृहस्पतिवार को संतोष गंगवार के कहने पर सेतु निगम के अफसर उनके कुछ प्रतिनिधियों के साथ लालफाटक और चौपुला पुल की मौजूदा स्थिति देखने भी पहुंचे।
चौपुला ब्रिज प्रोजेक्ट से पीली कोठी अलग
चौपुला स्थित पीली कोठी को फ्लाईओवर प्रोजेक्ट से अलग कर दिया गया है। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि पीली कोठी के पीछे से लेन बनाई जानी है क्योंकि कोठी मालिक की ओर से नई-नई शर्तें जोड़ दी जाती हैं। अब उन्होंने पांच करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा मांगा है जबकि प्रशासन ने पैमाइश कराकर बमुश्किल सत्तर लाख की कीमत बताई थी।
सेना की जमीन का पेच निकालने दिल्ली पहुंची सेतु निगम की टीम
बरेली। लालफाटक ओवरब्रिज के लिए कैंट एरिया में करीब 6500 वर्गमीटर भूमि ली जानी है। मुख्य परियोजना अधिकारी ने एक एई के नेतृत्व में विभागीय स्टाफ को रक्षा मंत्रालय में इसके लिए पैरवी के लिए दिल्ली भेज दिया है। वैसे तो लालफाटक ओवरब्रिज का काम शुरू करने से पहले ही सभी एनओसी ली जानी चाहिए थीं, लेकिन सेतु निगम ने इसके बगैर ही काम शुरू कर दिया। इसी कारण मामला अब तक लटका हुआ है। कुछ समय पहले सेतु निगम के सीपीएम देवेंद्र सिंह ने अपने एमडी को यह लेटर भी भेजा था कि कैंट की जमीन जल्द न मिली तो ओवरब्रिज का निर्माण ठप हो सकता है। अब सीपीएम ने विभाग के एक एई सहित स्टाफ को दिल्ली भेज दिया है।