बरेली। रामगंगा प्रोजेक्ट के तहत 12 गांव में होने वाली जमीन अधिग्रहण के खिलाफ 12 गांवों के किसानाें की मंगलवार को कमिश्नरी में कमिश्नर के साथ बैठक थी। किसानों को 31 अगस्त को कमिश्नरी बुलाया गया था। कमिश्नर किसी बैठक को लेकर बदायूं निकल गए। किसान जब कमिश्नरी पहुंचे तो बताया गया कि बैठक आज नहीं होगी। इस पर किसान भड़क गए और कमिश्नरी का घेराव कर नारेबाजी करने लगे। कमिश्नरी के सामने सड़क जाम कर दी। करीब चार घंटे प्रदर्शन के बाद जब बात नहीं बनी तो किसान पैदल मार्च निकालते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। वह डीएम से मिलने की जिद कर रहे थे लेकिन एसडीएम उन्हें समझाते रहे। बात नहीं बनने पर किसान वापस लौट गए।
रामगंगा आवासीय योजना विस्तार के लिए 12 गांव की जमीनों के अधिग्रहण की कार्यवाही तेज कर दी गई है। इसी बीच किसानों ने विरोध शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि वह अपनी जमीनें नहीं देंगे। जब किसान जमीन देने को तैयार नहीं है तो प्रशासन क्यों जबरन बैठकें करा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को कमिश्नरी में कमिश्नर के साथ किसानों की बैठक प्रस्तावित थी। कमिश्नर बदायूं निकल गए। किसान तय समय पर कमिश्नरी पहुंचे तो पता चला कि बैठक स्थगित कर दी गई है। इसी बात से किसान नाराज हो गए और पहले कमिश्नरी का घेराव कर लिया। कोतवाली पुलिस ने कमिश्नरी के गेट पर पुलिस और पीएसी बुला ली। किसान पहले गेट पर नारेबाजी करते रहे फिर सुरक्षा घेरा को तोड़ते हुए कमिश्नरी के अंदर चले गए और करीब चार घंटे तक नारेबाजी करते रहे। इस दौरान किसानों के बीडीए के खिलाफ भी नारेबाजी की।
सदर एसडीएम विशु राजा किसानाें को कमिश्नरी में करीब दो घंटे तक समझाते रहे लेकिन किसान किसी भी बात पर समझने को तैयार ही नहीं हुए। किसान कमिश्नर के साथ होने वाली बैठक की बात पर अड़े रहे। किसानों का कहना था कि कमिश्नर ने बैठक रद्द की है तो उन्हें बताया क्यों नहीं गया। किसान अपना काम छोड़कर बैठक में शामिल होने आए थे लेकिन अचानक बैठक रद्द कर दी गई।
नारेबाजी करते हुए जाम कर दी सड़क
कमिश्नर से मुलाकात नहीं हो पाने पर किसानों ने भाजपा विधायक बहोरनलाल मौर्य के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कमिश्नरी के सामने सड़क जाम कर दी। सड़क पर बैठकर धरना देना शुरू कर दिया। इस पर पुलिस ने किसानों को वहां से उठाया। किसानों ने वहां से ही पैदल मार्च निकालना शुरू कर दिया और कलक्ट्रेट पहुंच गए। यहां भी सदर एसडीएम विशु राजा ने उनसे बात की और वही बातें उन्हें समझाई लेकिन किसानों ने एक नहीं सुनी। सदर एसडीएम ने कहा कि सभी गांवों के दो-दो किसान अपने गांव का प्रतिनिधित्व करते हुए कमिश्नर से मुलाकात कर ले। किसान इस पर तैयार नहीं हुए। बाद में करीब दस किसानों की ओर से दस किसानों ने डीएम से मुलाकात की। डीएम नीतिश कुमार ने किसानों से कहा कि बिना किसानों की मर्जी के उनकी जमीन नहीं ली जाएगी। इसके बाद किसान वापस लौट गए।
इन गांवों से ली जानी है जमीन
बरेली विकास प्राधिकरण रामगंगा आवासीय योजना का विस्तार कर रहा है। आवासीय कालोनी बसाने के लिए चंद्रपुर बिचपुरी, डोहरिया, अब्दुलापुर माफ ी, कलारीलालपुर, इटऊआ बेनीराम, मोहनपुर उर्फ रामनगर, अहरौला, बालीपुर अहमद, नहरिया, नबदिया झादा, कचौली की जमीनों को प्राधिकरण अपने कब्जे में लेना है। किसान अपनी जमीने देने को तैयार नहीं है। इधर प्रशासन ने किसानों के लिए दो विकल्प रखे हैं। आपसी समझौते के आधार पर किसान अपनी जमीनें दे सकते हैं। वही चाहे तो पूल मैथेड यानी अविकसित जमीन देकर उसका एक विकसित हिस्सा किसान वापस ले सकते हैं।
समर्थन में कलक्ट्रेट पहुंचे सपाई
बरेली। कलक्ट्रेट में किसान प्रदर्शन कर रहे थे। उसी समय सपा जिलाध्यक्ष अगम मौर्य सपाइयों के साथ किसानों के समर्थन में पहुंचे। अगम मौर्य ने कहा कि किसानों की जमीन का जबरन अधिग्रहीत करना शासन-प्रशासन की मनमानी है। कहा, प्रशासन का यही उत्पीड़न जारी रहा तो सपा किसानों के पक्ष में आंदोलन करेंगे।
बीडीए का दावाः पुश्तैनी नहीं है किसानों की जमीन, कब्जे किए हैं
बरेली। बीडीए का दावा है कि बिचपुरी के गांव का गूगल अर्थ एप के माध्यम से सर्वे कराया है। सर्वे में जमीन पर कब्जे होने की बात सामने आई है। 2011 तक जमीन खाली थी और 2012 में जमीन पर कब्जे होना शुरू हो गए।
बीडीए वीसी जोगिंदर सिंह ने बताया कि बीडीए ने 2004 को रामगंगा नगर आवासीय योजना के तहत डोहरा रोड पर जमीन अधिग्रहीत की थी। बहुत से ऐसे किसान भी थे जिन्होंने मुआवजा लेकर जमीन पर खेती करना नहीं छोड़ा। इसके बाद वहां कब्जे होने लगे। प्राधिकरण ने जब इन कब्जेदारों को हटाना शुरू किया तो उन्होंने यह कहकर कब्जा नहीं हटाया कि वो पुश्तैनी इस जमीन पर बसे हुए है। इसके बाद प्राधिकरण ने गूगल अर्थ एप के जरिए 2004 से 2019 तक का सर्वे कराया। जो वीडियो, फु टेज सामने आए वो चौंकाने वाले हैं। बिचपुरी गांव में 2011 तक खाली जमीन थी, लेकिन अचानक 2012 से 2017 तक तेजी से जमीन पर कब्जा होना शुरू हो गया।
सरकार आवास दे रही, बीडीए छीन रहा
‘हम एक भी किसान जमीन देने को तैयार नहीं है। उसके बाद प्रशासन जबरन हमारी जमीन का अधिग्रहण करने कार्यवाही आगे बढ़ा रहा है। किसानों को परेशान किया जा रहा है।’ - नरेंद्र सिंह पटेल, अब्दुल्ला पुर्वा
‘बीडीए की तरफ एक अफवाह फैला दी गई है कि किसान जमीन देने को सहमत हो गए हैं। इससे किसान परिवार परेशान है। जबकि हकीकत यह है कि कोई किसान तैयार नहीं है।’ - रवि मौर्या, चंदपुर बिचपुरी
‘जब हम किसान एक सुर में कह रहे हैं कि हम जमीन नहीं देंगे तो समझ नहीं आ रहा है कि प्रशासन क्यों जबरन बैठकें बुलाकर हमें परेशान कर रहा है। हमारी कोई जनप्रतिनिधि भी नहीं सुन रहा।’ - रामकिशोर, बालीपुर
‘सरकार का दावा है कि वह लोगों को रहने के आवास दे रही है। यहां उल्टा हो रहा है। बरेली में बीडीए किसानों के मकान उनसे छीन रही है। जबरन मकान खाली करने की बात की जा रही है।’ - जिया लाल, अब्दुल्ला पुर्वा
‘हम सभी शुरू से कह रहे हैं कि हम जमीन नहीं देंगे। उसके बाद गांव में फोर्स और अधिकारियों की टीम जाती है। किसानों को आए दिन परेशान किया जा रहा है।’- ठाकुर दास मौर्या, कलारी
‘हमें अपनी जमीन नहीं देनी है। अधिकारी कह रहे हैं कि जबरन किसी से जमीन नहीं ली जाएगी। यही बात हम किसान अधिकारियों से लिखित में मांग रहे हैं तो यह तैयार नहीं है।’- लक्ष्मी नारायण, अब्दुल्ला पुर्वा
‘पहले किसानों के साथ बैठक करने को बुलाया। फिर बिना किसानों को बताए बैठक रद्द कर अधिकारी कहीं और चले गए। हमें धोखे में रखकर अधिग्रहण की प्रक्रिया बढ़ा रहे हैं।’ - नितिन कुमार जयंत, अब्दुल्ला पुर्वा
‘गांवों में सभी किसान मजदूरी भी करने जाते हैं। एक दिन काम न करे तो परिवार को रोटी नहीं मिल सकेगी। ऐसे में प्रशासन हमारे परिवार को परेशान कर रहा है।’ - रामबेटी, चंदपुर बिचपुरी
‘रोजाना मकान खाली कराने के लिए फोर्स भेजी जाती है। कुछ अधिकारी तो अभद्रता भी करते हैं। हम गरीबी से लड़ें कि अपने मकान बचाने के लिए इन अधिकारियों से। - अनीता राठौर, चंदपुर बिचपुरी