मुफ्ती आजम हिंद और रेहाने मियां के कुल की अदा की गई रस्म
बरेली उर्स-ए-रजवी में दूसरे रोज मुस्लिम महिलाओं को पर्दे की ताकीद की गई। बरेलवी मसलक के मौलाना मुख्तार बहेड़वी ने तकरीर करते हुए मुसलमानों से कहा कि वे अपनी बहन-बेटियों से पर्दा कराएं और खुद उनकी हिफाजत करें। उर्स में हजरत जीलानी मियां, मुफ्ती आजम हिंद और रेहाने मिल्लत के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।
उर्स स्थल इस्लामिया ग्राउंड पर रात को जलसे में मौलाना मुख्तार बहेड़वी ने कहा कि पर्दा इस्लाम का अहम हिस्सा है। बेटियां जब शादी लायक हो जाएं तो अच्छा घर देखकर शादी करें। उन्हें दहेज की जगह अपनी विरासत में हिस्सा दें। मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि हमें बुजुर्गों से फैज हासिल करना है तो शरीयत के मुताबिक चलना होगा। उन्होंने नौजवानों को आगाह करते हुए कहा कि वे गुमराहियत से बचें। आला हजरत, मुफ्ती आजम हिंद और रेहाने मिल्लत की ओर से किए गए दीनी और मसलकी कामों का जिक्र भी किया। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मौजूदा वक्त में मुसलमानों के तमाम मसाइल पर चर्चा की।
मौलाना जाहिद रजा, मौलाना बशीरुल कादरी, मुफ्ती अनवर हुसैन (नेपाल) आदि ने भी खिताब किया। जलसे की सरपरस्ती दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) और सदारत सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी (अहसन मियां) ने की। तकरीब उर्स प्रभारी सैयद आसिफ मियां की देखरेख में पूरी की गईं। देर रात 1:40 बजे मुफ्ती आजम हिंद के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि रविवार को उर्स की तकरीब सुबह कुरान ख्वानी से शुरू हुई। इसके बाद महफिल का आगाज कारी सखावत ने तिलावते कुरान से किया।
हाजी गुलाम और आसिम नूरी ने मीलाद का नजराना पेश किया। उलमा की तकरीर के बीच सुबह 9:58 बजे रेहोने मिल्लत का कुल हुआ। इसके बाद 10:40 बजे हजरत जिलानी मियां के कुल की रस्म अदा की गई। मदरसा मंजरे इस्लाम के सदर एवं प्रधानाचार्य मुफ्ती अकील, मुफ्ती सलीम नूरी, मुफ्ती अफरोज आलम, मुफ्ती जमील आदि मौजूद रहे। निजामत कारी यूसुफ रजा ने की।
उर्स-ए-रजवी में आज
कुरान ख्वानी से सुबह छह बजे उर्स की तकरीब शुरू होंगी। तकरीर का सिलसिला सुबह आठ बजे शुरू होगा। दोपह 2:38 बजे आला हजरत के कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी। इसी के साथ उर्स का समापन होगा।