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कोरोना सैंपलिंग भी अब हवा में... नोडल

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बरेली। कोरोना की तीसरी लहर से मुकाबले के लिए तैयारी के दावे हवा में किए जा रहे हैं। रोडवेज, जंक्शन और टोल प्लाजा पर सैंपलिंग के लिए टीमें सिर्फ कागजों में दौड़ रही हैं। थोड़े-बहुत जिन लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं, उनकी रिपोर्ट पोर्टल पर अपडेट नहीं हो रही है। नोडल अफसर ने इसके लिए स्टाफ की भारी कमी को जिम्मेदार बताया है।
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दूसरे राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले फिर बढ़ने लगे हैं। माना जा रहा है कि संवेदनशील राज्यों से आवाजाही शुरू होने और स्कूल खुलने से यहां भी संक्रमण बढ़ने का खतरा बढ़ा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अफसर कागजी खानापूरी के दम पर तीसरी लहर से मुकाबले का दावा कर रहे हैं। संवेदनशील राज्यों से आने वालों की जांच के लिए सुबह दस से दोपहर तीन बजे तक सिर्फ एक शिफ्ट में रेलवे जंक्शन और बस अड्डों पर सैंपलिंग हो रही है जबकि यहां दिन भर बाहर से आने वालों का तांता लगा रहता है। सिर्फ छह घंटे सैंपलिंग कर 24 घंटे निगरानी का दावा किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य विभाग के पास स्थायी, अस्थायी समेत संविदा पर काफी कर्मचारी तैनात थे। लहर थमने के बाद बड़ी तादाद में स्टाफ हटा दिया गया। अब चार एलटी और छह सहायक ही बचे हैं। एलटी की तादाद कम होने से स्टेटिक टीमों की संख्या भी कम हो गई है। लिहाजा एक शिफ्ट से ज्यादा सैंपलिंग करना संभव नहीं है।
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रोज औसतन तीन हजार कम लिए जा रहे हैं सैंपल
अब जो सैंपल हो रहे हैं, उनमें से करीब 40 फीसदी सैंपल उत्तराखंड, दिल्ली, मुंबई, गुजरात, चंडीगढ़ के अलावा धार्मिक स्थलों पर जाने वाले लोगों के हैं। पिछले चार माह की रिपोर्ट पर गौर करें तो अब रोजाना तीन हजार सैंपल की जांच कम हो रही है। अब रोज करीब पांच हजार सैंपल लिए जा रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या आठ हजार के आसपास थी। अफसरों के मुताबिक टीमें सक्रिय हैं पर सैंपलिंग सेंटर पर जांच कराने के लिए लोग नहीं पहुंच रहे हैं।
पीकू वार्ड बने पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं
तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की आशंका के चलते शासन के निर्देश पर बिथरी के अलावा सभी सीएचसी में 10 बेड के कोरोना वार्ड बनकर तैयार हो चुके हैं। बहेड़ी, मीरगंज, आंवला और तीन सौ बेड कोविड अस्पताल में पीकू वार्ड बन चुके हैं। उपकरण भी लग गए हैं, लेकिन अब तक बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो सकी है। हालांकि इसके लिए शासन को कई बार पत्र भी लिखा जा चुका है।
सैंपलिंग के लिए टीमें सक्रिय हैं लेकिन स्टाफ कम होने से चरणवार सैंपलिंग नहीं हो पा रही है। सैंपल को पोर्टल पर अपडेट न करने की शिकायतों को दूर कराया जा रहा है। एयरपोर्ट पर एमएमयू और दूसरी जगहों पर स्टेटिक टीमें सैंपल कर रहीं हैं। स्टाफ के लिए उच्चाधिकारियों को कहा गया है। - डॉ. सीपी सिंह, डिप्टी एसीएमओ और सैंपलिंग इंचार्ज
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