प्रशासन-स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में जमीन-आसमान के फर्क से संशय
बरेली। कोरोना के बढ़ते केस के बीच सामुदायिक संक्रमण का खतरा भी पैदा हो रहा है। इस खतरे को भांपते हुए प्रशासन स्पेशल एडवाइजरी भी जारी कर चुका है। अब बाहर से आए एक एक व्यक्ति को चिह्नित करने के लिए प्रशासन ने 500 लेखपालों की फौज मैदान में उतार दी है।
लॉकडाउन के बाद दिल्ली, गुजरात सहित दूसरे राज्य व जिलों से वापस आने वालों लोगों पर नजर रखनी थी। कोरोना के लक्षण वालों की टेस्टिंग भी होनी थी। डीएम ने शुरूआत में सर्वे भी कराया था लेकिन बाद में हजारों की तादाद में मजदूरों के पैदल-साइकिल से चोरी छिपे आ जाने से इस सर्वे की हवा निकल चुकी है। जबकि जिले में कोरोना संक्रमितों की तादाद में काफी बढ़ोत्तरी हो रही है। मुश्किल यह भी है कि प्रशासन के पास अभी प्रवासी मजदूरों का केवल 14 से 15 हजार का ही आंकड़ा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग यह संख्या करीब 44 हजार बता रहा है। इससे प्रशासनिक अधिकारियों की उलझन और भी बढ़ गई है। सामुदायिक संक्रमण को रोकने के लिए बाहर से आए लोगों को नए सिरे से चिह्नित करना शुरू कर दिया है। इसके लिए लेखपालों से दूसरे सारे काम हटाकर केवल यह सर्वे करने में ही जुटा दिया गया है।
कम्युनिटी किचन-जंक्शन पर ड्यूटी से मुक्त हुए लेखपाल
प्रवासी श्रमिकों के सर्वे में लगाए गए लेखपालों को कम्युनिटी किचन और जंक्शन पर आने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के लोगों को रवाना करने की ड्यूटी से मुक्त कर दिया गया है। तहसील सदर प्रशासन में 80 लेखपाल है। अब ये काम संग्रह अमीन करेंगे।
राशनकार्ड, आवास सहित दूसरी योजनाओं को भी नहीं मिल सकेगा फायदा
सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रवासी मजदूरों के लिए राशनकार्ड, सस्ता आवास और रोजगार सहित उनकी दूसरी जरूरी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर प्लानिंग बनानी शुरू कर दी है। प्रशासन ने अगर प्रवासियों का सही आंकड़ा नहीं दिया तो अधूरे व गलत सर्वे पर बनने वाली योजनाओं से हजारों गरीब के हाथ से तमाम हितकारी योजनाएं निकल जाएंगी।