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हर फिक्र को धुएं में उड़ाने की मत सोचना.. दम घोंट सकता है कोरोना

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कोरोना में धूम्रपान - फोटो : social media
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विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष

संक्रमित के संपर्क में आने पर बीमार फेफड़ों में तेजी से संक्रमण फैलने की आशंका

बरेली। कोरोना संक्रमण के इस दौर में हर किसी के सिर मंडराते मौत के साए के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि धूम्रपान करने वालों को इस बीमारी का जोखिम अधिक रहता है। वायरस की चपेट में आने पर उन्हें सघन चिकित्सा और वेंटिलेटर की जरूरत भी धूम्रपान न करने वाले मरीजों से ज्यादा होती है। 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर शहर के प्रमुख डॉक्टरों ने तंबाकू की लत से तौबा करने की अपील की है। ताकि आप, आपका परिवार और समाज सुरक्षित रहे।
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वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुदीप सरन का कहना है कि बीड़ी, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वाले लोग न केवल अपने जीवन से खिलवाड़ करते हैं, बल्कि घर-परिवार की जमा पूं्जी को भी इलाज में फूंक देते हैं। अबकी बार मनाए जा रहे विश्व तंबाकू निषेध दिवस की थीम- प्रोटेक्टिंग यूथ फ्रॉम इंडस्ट्री मैनिपुलेशन एंड प्रिवेंटिंग देम फ्रॉम टोबैको एंड निकोटिन यूज पर केंद्रित है। उन्होंने बताया कि तंबाकू के किसी भी अवयव का सेवन करने वाले व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, ऐसे लोगों में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा अधिक होता है। ऐसा व्यक्ति अगर इसकी चपेट में आ गया तो उसके अंदर वायरस से लड़ने की ताकत नहीं होगी, जिसके चलते कोरोना उसके शरीर को जल्दी प्रभावित कर देगा, जो जानलेवा हो सकता है।

बंद करें धूम्रपान, काढ़े का करें सेवन

डॉ. रवीश अग्रवाल ने तंबाकू, सिगरेट का सेवन करने वालों को तत्काल इसे बंद करने को कहा है। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गिलोय, तुलसी, नीम, नींबू का काढ़ा पीने को कहा है। उन्होंने बताया कि तंबाकू और सिगरेट का सेवन करने से 80 प्रतिशत लोग कैंसर और दमा समेत अन्य बीमारी की चपेट में आते हैं। इसमें उनको कई प्रकार की क्षति होती है। आखिर में उनके पास कुछ नहीं बचता है।

कड़े कानून पर कड़ाई से पालन नहीं

कोटपा अधिनियम के तहत सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री सार्वजनिक स्थलों जैसे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, रेलवे प्रतीक्षालय, न्यायालय परिसर, शैक्षणिक संस्थान, कैंटीन, कैफे, क्लब, होटल, रेस्टोरेंट आदि में प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने पर जुर्माने का भी प्रावधान है। साथ ही इन उत्पादों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से विज्ञापन, प्रोत्साहित करने और प्रेरित करने पर जुर्माना या दो साल की सश्रम कैद या दोनों का दंड मिल सकता है। बावजूद इसके लोग धड़ल्ले से इन उत्पादों का विक्रय और सेवन रहे हैं।
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