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मंत्री को धोखा देते हैं... पब्लिक को क्या छोड़ेंगे

सार

सिंचाई अफसरों ने विभागीय मंत्रियों की समीक्षा बैठक में हर बिंदु पर बोला झूठ, कई मामलों में लापरवाही की भी पोल खुली
 
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पुलिस लाइन सभागार में बैठक करते जलशक्ति मंत्री।
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विस्तार
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जलशक्ति विभाग के मंत्री व राज्यमंत्री ने पुलिस लाइन सभागार में की बैठक
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बहेड़ी विधायक छत्रपाल सिंह ने हकीकत बताई तो अफसरों ने मांग ली माफी
बरेली। सिंचाई विभाग में राजकाज की क्या हालत है, यह रविवार को विभागीय मंत्रियों की बैठक में सामने आया। विभाग के कैबिनेट और राज्यमंत्री के सामने अफसरों ने एक-एक करके कई झूठ पेश किए। अफसरों का दुस्साहस कामयाब भी हो जाता लेकिन बहेड़ी के विधायक व राजस्व राज्यमंत्री छत्रपाल गंगवार ने उनकी पोल खोल दी। झूठ पकड़े जाने पर अफसर अचकचाए तो लेकिन फौरन ही माफी मांग ली। विभागीय मंत्रियों ने चेतावनी देकर उन्हें माफ भी कर दिया।
जल शक्ति विभाग के मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह और राज्यमंत्री दिनेश खटीक रविवार दोपहर करीब तीन बजे हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइन ग्राउंड में उतरे थे। पुलिस लाइन सभागार में ही उन्होंने विभागीय अफसरों के साथ बैठक कर बाढ़ और निर्माण कार्यों की समीक्षा की। बाढ़ खंड विभाग के एक्सईएन राजेंद्र कुमार ने दोनों मंत्रियों को बताया कि इस बार रामगंगा में करीब दस साल बाद उफान आया जिससे करीब ढाई सौ गांव प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि राहत और बचाव कार्यों के साथ जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे भी कराया जा रहा है।
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एक्सईएन ने मंत्रियों के सामने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन भी दिया। डॉ. महेंद्र सिंह ने बैराज, बांध, पुलिया के निर्माण कार्य के बारे में पूछा तो सिंचाई खंड रुहेलखंड के एक्सईएन मुकेश कुमार ने बताया कि कुछेक काम के अलावा बाकी सभी पूरे हो चुके हैं।

पकड़े गए झूठ पर झूठ हर झूठ पर मांगी माफी
झूठ- 1
बनाए बगैर कह दिया बन चुकी है पुलिया
अफसरों ने मंत्रियों के सामने पहला झूठ देवरनिया में एक पुलिया निर्माण के बारे में बोला। मंत्री के पूछने पर रुहेलखंड डिविजन के एक्सईएन ने दावा किया कि पुलिया का निर्माण पूरा हो चुका है। राजस्व राज्यमंत्री छत्रपाल गंगवार ने इस पर आपत्ति जताई तो फाइल मंगाई गई। फाइल में लगा फोटो चठिया की पुलिया का निकला लेकिन उसके नीचे देवरनिया लिखा हुआ था। झूठ पकड़ा गया तो अफसरों ने सफाई दी कि चूकवश ऐसा हो गया।
झूठ- 2
किच्छा नदी में बाढ़ तो आई पर नुकसान नहीं
दूसरा झूठ किच्छा नदी से हुई तबाही के बारे में बोला गया। अफसरों ने दावा किया कि किच्छा नदी से आसपास के इलाकों में कोई तबाही नहीं हुई है, इस पर भी राज्यमंत्री छत्रपाल बिफर गए। उन्होंने कहा कि किच्छा नदी ने इलाके में भारी तबाही मचाई है लेकिन अफसर जिस तरह आंकड़ों में सबकुछ सामान्य दिखा रहे हैं, उससे जाहिर है कि उन्होंने कोई सर्वे ही करने की जरूरत नहीं समझी है। एक्सईएन ने फिर मंत्री से माफी मांगी और गलत जानकारी दर्ज होने की बात कही। मंत्री ने चेतावनी दी कि दोबारा ऐसा झूठ बोला तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
झूठ- 3
विभागीय जमीन पर कहीं भी कब्जे नहीं
जल शक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने सिंचाई विभाग की जमीन पर कब्जों के बारे में पूछा तो एक्सईएन ने बताया कि जो कब्जे थे, उन्हें हटाया जा चुका है। इस पर फिर राज्यमंत्री छत्रपाल का पारा चढ़ गया। उन्होंने कहा कि बहेड़ी के बकैनिया में सिंचाई विभाग की करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा है। इतने ज्यादा पक्के अवैध निर्माण कर लिए गए हैं कि किसानों का अपने खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। मंत्री डॉ. महेंद्र ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को पुलिस की मदद से अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए। दो दिन बाद रिपोर्ट भी देने को कहा कि कब्जे हटे या नहीं।

दिसंबर में नहीं नवंबर में पूरी हो नहरों की सफाई
जलशक्ति मंत्री ने निर्माणाधीन पुलों के बचे कार्य को नवंबर तक हर हाल में पूरा करने का आदेश दिया। रुहेलखंड नहर विभाग के अधिकारी से नहरों की सफाई के बारे में पूछा तो उन्होंने दिसंबर के आखिर तक काम पूरा होने की बात कही। इस पर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि दिसंबर में नहरें साफ होंगी तो किसानों तक पानी कब पहुंचेगा। अभी बुवाई शुरू हो रही है इसलिए हर हाल में नवंबर तक सफाई कर ली जाए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से नहरों की सफाई का सत्यापन और पुलोें का उद्घाटन कराने को भी कहा।
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लोग कैसे जानेंगे जमीन के नीचे कितना पानी
डॉ. महेंद्र सिंह ने नलकूप विभाग से भूमिगत जल स्तर की जांच के लिए लगाए गए उपकरणों के बारे में पूछा तो बताया गया कि प्रत्येक चिन्हित स्थान पर उपकरण लगा हुआ है। इस पर मंत्री ने पूछा कि लोगों को कैसे पता चलेगा कि जमीन में कितना पानी घटा या बढ़ा है तो अधिकारी बगले झांकने लगे। मंत्री ने इस संबंध में प्रचार-प्रचार कराने का निर्देश दिया। भूमिगत जल संरक्षण के लिए सरकारी भवनों, स्कूलों, मेडिकल कॉलेज और पूर्व निर्मित भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने को कहा। खराब नलकूपों की भी मरम्मत कराने के निर्देश दिए।
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