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सावधानी: महिलाएं तो समझ रहीं हैं परिवार नियोजन की अहमियत पर पुरुष बेपरवाह

Mon, 27 Jun 2022 02:34 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अजीत प्रताप सिंह, बरेली 

सार

परिवार नियोजन के विकल्पों को अपनाने में महिलाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं। उच्च प्रजनन दर की सूची में शामिल है बरेली, यहां औसतन एक दंपती के तीन बच्चे हैं।
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परिवार नियोजन
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विस्तार
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बढ़ती जनसंख्या पर अंकुश लगाने के लिए परिवार नियोजन बेहद जरूरी है। यह तभी संभव है जब महिलाएं और पुरुष दोनों ही अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझें। महिलाएं तो इसके प्रति गंभीर भी हैं पर पुरुष बेपरवाह हैं। हाल ही में जारी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (एनएफएचएस-5) की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं में परिवार नियोजन के प्रति सजगता लगातार बढ़ रही है। उनकी तुलना में पुरुषों का आंकड़ा कई गुना पीछे है।

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एनएफएचएस की सर्वे रिपोर्ट में बरेली शहर की 15 से 49 वर्ष आयुवर्ग की महिलाओं को शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार परिवार नियोजन के साधनों का प्रयोग करने का आंकड़ा अब और बढ़ा है। इसमें महिलाएं अब भी पुरुषों से आगे हैं। लिहाजा, बरेली की प्रजनन दर 2.7 फीसदी के आसपास दर्ज हो रही है। यानी प्रति परिवार में तीन बच्चों का औसत आंका जा रहा है। बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से तमाम योजनाओं का संचालन किया जा रहा है पर परिणाम में कोई खास परिवर्तन अब तक सामने नहीं आ सका है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में  पुरुष नसबंदी 14,  महिला नसबंदी 3936, आईयूसीडी 24367, पीपीआईयूसीडी 12952, त्रैमासिक अंतरा इंजेक्शन 8105, कंडोम (सीवाईपी) 9322, छाया 38044 और माला एन/डी का प्रयोग करने में 7834 महिला लाभार्थी दर्ज हुई हैं। कंडोम का प्रयोग करने वाले पुरुषों की तादाद भी बढ़ी है। आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2020-21 में 538844 लाख कंडोम की खपत हुई थी जो अब बढ़कर 801282 तक पहुंच चुकी है।

68 फीसदी महिलाएं कर रहीं किसी न किसी साधन का प्रयोग
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार अब बरेली की 68 फीसदी महिलाएं परिवार नियोजन के किसी न किसी साधन का प्रयोग कर रही हैं। यह आंकड़ा एनएफएचएस-4 सर्वे में 64.9 फीसदी था। महिला नसबंदी अब 16.7 फीसदी तक पहुंच चुकी है। जो पूर्व के सर्वे में 14.4 फीसदी थी। यहां भी चार फीसदी का वृद्धि दर्ज हुई है, जबकि पुरुषों की नसबंदी का ग्राफ 0.4 फीसदी पर ही सिमटा हुआ है। गर्भ निरोधक गोलियों के सेवन का आंकड़ा पिछले सर्वे की तुलना में एक फीसदी बढ़कर 3.3 फीसदी दर्ज हुआ है।
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आईयूडी, पीपीआईयूडी और इंजेक्शन के प्रयोग से महिलाएं कर रही हैं परहेज, बताई तकलीफ प्रसव के बाद परिवार नियोजन के साधन का तरीका आईयूडी, पीपीआईयूसीडी (पोस्टपार्टम इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस) के प्रयोग का आंकड़ा अब कम हुआ है। सर्वे रिपोर्ट चार के दौरान 1.8 फीसदी महिलाओं ने इनका प्रयोग किया था पर अब 0.8 फीसदी ही इनका प्रयोग कर रही हैं। इसी तरह परिवार नियोजन के लिए इंजेक्शन के इस्तेमाल में भी पिछले सर्वे के अनुसार करीब 0.4 फीसदी की कमी दर्ज हुई है। इन तरीकों के प्रयोग के बाद 59.9  फीसदी महिलाओं ने साइड इफेक्ट की बात कही है।

भ्रामक सूचनाओं से जूझ रहा है पुरुष वर्ग
मनोचिकित्सक डॉ. आशीष के मुताबिक करीब 99 फीसदी पुरुष भ्रामक सूचनाओं की चपेट में हैं। उन्हें नसबंदी या कंडोम प्रयोग के बाद चरमसुख प्रभावित होने, नसबंदी तकलीफदेह होने, जननांग संबंधी कैंसर का खतरा बढ़ने, डिमेंशिया की चपेट में आने समेत अन्य गलतफहमी हैं, जबकि शोध के अनुसार यह सब मिथक हैं। नसबंदी या परिवार नियोजन के साधनों के प्रयोग के दौरान कोई भी क्रिया प्रभावित नहीं होती। यौन रोग एचआईवी-एड्स, सिफलिस जैसी संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।

परिवार नियोजन के लिए चल रही योजनाएं
बरेली प्रदेश के उच्च प्रजनन दर वाले जिलों की सूची में शामिल है। लिहाजा, शासन की ओर से परिवार नियोजन के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि नसबंदी कराने पर पुरुष और महिला को आर्थिक मदद, सास, बेटा-बहू सम्मेलन, बॉस्केट ऑफ च्वॉइस समेत आशा, एएनएम के जरिए गांव और शहर में महिलाओं और पुरु षों को जागरूक किया जा रहा है। प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर परिवार नियोजन के साधन के विकल्प उपलब्ध हैं। जो पूरी तरह निशुल्क हैं।

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