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बरेली का जिला अस्पताल तो कंगाल हो गया  

Thu, 04 May 2017 01:12 AM IST
बरेली।  
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Bareilly's district hospital became poor - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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बरेली का जिला अस्पताल दवाआें के मामले में कंगाल हो गया है। यहां न तो एंटीबायोटिक हैं और न ही जीवन रक्षक दवाएं। अगर आपको उल्टी दस्त हो जाए तो ठीक होना मुश्किल होगा। मरीज अस्पताल छोड़कर भाग रहे हैं। रूई भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। अस्पताल प्रशासन ने भी बजट न आने तक हाथ खड़े कर दिए हैं। जिला अस्पताल में 327 दवाओं में 126 ही मौजूद हैं। यह चुगली शासन की ड्रग मॉनीटरिंग वेबसाइट तो कर ही रही है, साथ में मौजूदा हालात भी इसे पुख्ता करते हैं। 
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एक माह से ज्यादा समय हो गया है जिला अस्पताल में दवाआें का संकट खत्म होने का नाम नहीं हैं। कई बार रैबीज के इंजेक्शन खत्म हो चुके हैं और एंटीबायोटिक दवाएं नहीं हैं। इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को दवाएं उपलब्ध न हो पाने से कई मरीजों ने अपनी छुट्टी करा ली है, जबकि कुछ मरीजाें को डॉक्टरों ने साफ तौर पर बता दिया है कि दवा नहीं है इलाज मुश्किल है। पिछले दिनों डॉक्टरों ने इस संबंध में प्रमुख अधीक्षक डॉ. केएस गुप्ता को भी मौखिक तौर पर समस्या से अवगत कराया था, लेकिन बजट न होने से उन्होंने भी अपनी मजबूरी बता दी है। शासन द्वारा ड्रग मॉनीटरिंग वेबसाइट में हर दिन दवाओं की उपलब्धता बतानी पड़ती है। बुधवार 03 मई को इसमें 327 दवाआें में केवल 126 ही अच्छी संख्या में उपलब्ध हैं। कुछ दवाएं तो मार्च 2016 से खत्म हैं।

आखिर क्यों आया इतना बड़ा संकट 
जिला अस्पताल में पहले एक- दो दवाआें को छोड़कर दवाआें का संकट नहीं रहा। लेकिन पिछले पांच माह से समस्या ज्यादा बढ़ गई है। दरअसल, जिला अस्पताल का वर्ष 2015 से 2016 में काफी बकाया दवा कंपनियाें पर हो गया है और वे अब दवाएं नहीं देना चाह रही हैं। करीब डेढ़ करोड़ रुपए बकाया होने से दवा नहीं मिल रही है। इसे चुकाने के लिए शासन से बजट मांगा गया तो उन्होंने 40 लाख रुपए वर्तमान में दवा खरीदने को भेजे हैं लेकिन पिछले बकाये की पूरी डिटेल मांग ली है। प्रमुख अधीक्षक ने सीएमएसडी प्रभारी सुशील यादव से जानकारी मांगी है। वहीं बताया जा रहा है कि बकाया बढ़ने के कई कारण है जिसमें लोकल परचेज से अंधाधुंध खरीद, महंगे इंजेक्शन और विटामिन व कैल्शियम की गोलियां भी खूब मंगाई गई है। 
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कुछ दवाएं थोक में, जबकि जरूरी दवाएं नहीं 
बच्चों के लिए अमिकासिन 12 हजार, एमॉक्सिसिलिन एंड क्लॉसिलिन ड्राय सिरप 7498, आस्थालिन 2000, क्लोरो 49 हजार, मल्टीविटामिन 40 हजार की मात्रा में है। जबकि पैरासिटामॉल मात्र 1800 और सिरप 4000, उल्टी की डामपेरिडॉन शून्य, पेट की बिफिलेक 45 ही हैं। बच्चों की दवाएं अधिक हैं जबकि वयस्क की दवाएं कम हैं। रूई और बैंडेज तक नहीं हैं। 

बोले डॉक्टर-- 
एंटीबायोटिक तो लगभग खत्म है, मरीजाें को दवा देना मुश्किल हो रहा है। कई बार मौखिक तौर पर प्रमुख अधीक्षक को समस्या के बारे में बताया जा चुका है।- डॉ. वीके धस्माना, चेस्ट फिजीशियन 
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हमारे कई मरीज अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद लौट गए। एक दिन तो इंजेक्शन तक नहीं था। कैसे इलाज करें।- डॉ. वागीश वैश्य, फिजीशियन
दवाआें का संकट बहुत बढ़ गया है। मरीजों को बताना पड़ रहा है कि दवाएं नहीं हैं। - अजय मोहन अग्रवाल, फिजीशियन 

दवाआें के बकाये पर जो सूचना मांगी गई थी वह शासन को भेज दी गई है। गुरुवार को बैठक में सीएमएसडी प्रभारी को साथ जाएंगे। वह ही जवाब देंगे। 
डॉ. केएस गुप्ता, प्रमुख अधीक्षक 

यह नहीं हैं दवाएं 
दवा                इलाज        मात्रा 
एमिनोफिलिन    सांस        0
एम्लोडाइपिन    बीपी        0
एंटीसेप्टिक सॉल्यूशन    एंटीबायोटिक    0
एंटी टिटनेस    टिटनेस    0
एंटी रैबीज    रैबीज    0
सेफोटेक्सिम एंटीबायोटिक    0
सेफोपेराजोन    एंटीबायोटिक 0
एजिथ्रोमाइसिन    एंटीबायोटिक    0
डेक्सामेथासन    जीवन रक्षक    0
डोमपेरिडोन    उल्टी    0
फ्लूकोनाजोल    फंगल इंफेक्शन    0
रेनिटिडिन    एसीडिटी    0
सालबुटामोल    सांस    0
थाइरॉक्सिन    थायराइड    0
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