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अमर उजाला मुहिम : विश्वविद्यालय का दर्जा न मिला तो करेंगे कार्य बहिष्कार

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बरेली कॉलेज कर्मचारीयों ने उच्च शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को स
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बरेली। 184 वर्षों की ऐतिहासिक विरासत को सहेजे बरेली कॉलेज को विश्वविद्यालय बनाने की मांग अब जनांदोलन में तब्दील होती जा रही है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। धरने के दौरान कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग जल्द पूरी न हुई तो कार्य बहिष्कार करेंगे।
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करीब छह माह से बरेली कॉलेज को राज्य/केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने और अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के तहत शुक्रवार को कर्मचारियों ने उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उच्च शिक्षा अधिकारी के प्रतिनिधि कार्यालय अधीक्षक विश्राम सिंह को सौंपा। उच्च शिक्षा अधिकारी उस वक्त कार्यालय में उपस्थित नहीं थे। कार्यालय अधीक्षक ने कर्मचारियों को उनकी मांगें मुख्यमंत्री तक पहुंचाने और उन्हें पूरा कराने का प्रयास करने का भरोसा दिलाया।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत दोपहर दो बजे कर्मचारी कल्याण सेवा समिति के बैनर तले धरना प्रदर्शन शुरू हुआ। सभी कर्मचारियों ने कॉलेज, छात्रों और शिक्षकों के हित में आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। कहा, कॉलेज का विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाएं बगैर वे चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी कर बरेली को गौरवान्वित करने वाले कॉलेज से भ्रष्टाचारियों को बाहर खदेड़ने का भी संकल्प लिया।
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जनहित की मांग न सुनना चिंताजनक
समिति के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्र ने कहा कि लंबे समय से बरेली कॉलेज को विश्वविद्यालय बनाने की मांग की जा रही है। मगर, सालों से हो रही इस मांग पर अब तक सुनवाई न होना बेहद चिंताजनक है। सभी कर्मचारी आंदोलित हैं और जल्द ही आंदोलन को और तेज करेंगे। इसके लिए अगर जल्द मांग पूरी न की गई तो सभी स्थायी और अस्थायी कर्मचारी कार्य बहिष्कार करेंगे।
जनहित का है मुद्दा, जनता का सहयोग मिले
सचिव हरीश मौर्य ने कहा कि बरेली कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने से अस्थायी कर्मचारियों को ही नहीं बल्कि कॉलेज के शिक्षकों और छात्रों समेत प्रशासन को भी लाभ होगा। पारदर्शिता होने से प्राप्त आय से परिसर और शिक्षण कार्य को बेहतर बनाया जा सकता है। जब तक मांग पूरी नहीं होगी, शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। जनता को जोड़ने के लिए ‘खुला मंच’ कार्यक्रम करेंगे।
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