शिक्षकों व कर्मचारियों की बैठक में तोड़फोड़ करने वालों को बताया गया गुंडा
अफसरों को भेजा पत्र, एतिहासिक कॉलेज की छवि को बचाना सभी का धर्म
बरेली। हाल ही में दो बार जबर्दस्त उपद्रव होने के बावजूद पुलिस और प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई न किए जाने पर आखिरकार शुक्रवार को बरेली कॉलेज को 25 अक्तूबर से अनिश्चितकाल के लिए बंद कर देने का एलान कर दिया गया। शिक्षकों और कर्मचारियों की बैठक में कॉलेज में तोड़फोड़ करने वालों को गुंडा बताया गया। कहा गया कि प्रशासन की अनदेखी कॉलेज को गुंडों का अड्डा बना रही है। एक दिन पहले प्राचार्य ने कॉलेज में तोड़फोड़ के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को जिम्मेदार ठहराया था।
तय कार्यक्रम के मुताबिक बरेली कॉलेज के सभागार में शुक्रवार को दोपहर दो बजे बैठक शुरू हुई। शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार व महासचिव डॉ. वीपी गौतम और कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा की अगुवाई में कॉलेज के ज्यादातर शिक्षकों व कर्मचारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में कहा गया कि कॉलेज में हुई मारपीट, तोड़फोड़ और अराजकता की घटनाएं एक शिक्षण संस्थान के लिए शर्मनाक हैं। प्रशासन का रवैया देखते हुए ऐसी घटनाओं के दोबारा होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस बैठक के दौरान कर्मचारियों ने कॉलेज की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को छात्र के बजाय गुंडा कहकर संबोधित किया।
करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक में शिक्षक संघ और कर्मचारी संघ की ओर से कई वक्ताओं ने अपने भाषण में आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके बाद शिक्षक संघ की ओर से पत्र जारी किया गया जिसमें कहा गया है कि महाविद्यालय के कर्मचारी सूर्य प्रकाश शर्मा के साथ मारपीट करने वाले और प्राचार्य कार्यालय में तोड़फोड़ करने वाले अराजक तत्वों के खिलाफ जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन 24 अक्तूबर तक कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे अन्यथा 25 अक्तूबर से कॉलेज को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा। यह पत्र अफसरों को भेज दिया गया है। प्राचार्य ने अलग से भी समुचित कार्रवाई के लिए कहा है।
घंटा भर पहले बंद कर दिया फार्म-फीस काउंटर
विद्यार्थियों के मुताबिक बैठक के लिए कॉलेज के कर्मचारियों और शिक्षकों ने प्रवेश प्रक्रिया घंटा भर पहले ही बंद कर दी। काउंटर बंद होने से विद्यार्थियों ने आपत्ति जताई पर कोई सुनवाई नहीं हुई। बैठक खत्म होने के बाद शाम करीब चार बजे कोतवाली पुलिस कॉलेज पहुंची तो छात्र एक बार फिर आशंकित हो उठे। हल्ला मचा कि कर्मचारियों और शिक्षकों की बैठक के दौरान हंगामा या नोंकझोंक जैसी सूचना पर पुलिस पहुंची है मगर बाद में पता चला कि बैठक के बाद उसमें लिए गए निर्णय की सूचना देने के लिए पुलिस बुलाई गई थी।