कोविड काल के बाद खुले स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में अब लगातार इजाफा हो रहा है। 15 दिनों में उपस्थिति करीब तीस फीसदी तक बढ़ गई है। नर्सरी हो या फिर बड़ी कक्षाएं, सभी में विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बनता है। पढ़ाई हों या फि र खेल से जुड़ी गतिविधियां, सभी में छात्र-छात्राओं का जोश कोरोना के डर पर भारी पड़ रहा है।
कोरोना महामारी से पहले स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति 80 फीसदी तक रहती थी। लगातार दो साल ऑनलाइन क्लास के बाद शुरू हुई ऑफलाइन कक्षाओं में अब उपस्थिति का आंकड़ा 90 फीसदी को पार कर गया है। शुरू में जब स्कूल खुले तो विद्यार्थियों की उपस्थिति 10 से 15 फीसदी तक ही थी। धीरे-धीरे बढ़कर 50 फीसदी पहुंची। कई दिनों तक आंकड़ा इसी के आसपास बना रहा, लेकिन 15 दिनों में यह तेजी से बढ़ा। अब यह आंकड़ा कई विद्यालयों में 90 फीसदी को भी पार कर गया है। स्कूलों का कहना है कि विद्यार्थियों की उपस्थिति में लगातार इजाफा हो रहा है। अभिभावक भी इससे राहत महसूस कर रहे हैं।
अभिभावकों से बात
कोविड काल के बाद शुरुआती दिनों में बच्चों को स्कूल भेजने में बहुत दिक्कत हुई। स्कूल जाने के नाम से ही बच्चे चिड़चिड़ाने लगते थे। तमाम बहाने बनाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब यह उनके रुटीन का हिस्सा बन गया है।
- विजय प्रकाश, किला
कोरोना थमने के बाद जब स्कूल खुले तो बच्चों ने कई बहाने बनाए। कई बार स्कूल से भी बताया गया कि बच्चा गुमसुम रहता है। यह सभी बच्चों के साथ था। अब बच्चे इसे सामान्य दिनचर्या मानकर खुशी-खुशी स्कूल जा रहे हैं।
- रूबी सिंह, अंबुज सुपरसिटी
स्कूलों की बात
कोविड काल के बाद जब पहले दिन स्कूल खुला था तो बच्चों की संख्या बेहद कम थी। हर कक्षा में दस, पंद्रह फीसदी ही बच्चे थे, इसलिए लंबे समय तक ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन कक्षाएं भी संचालित की गईं। अब बच्चों की संख्या सामान्य हो गई है। स्कूल में भी बच्चों के लिए तमाम गतिविधियां कराई जा रहीं हैं।
- अल्पना जोशी, प्रिंसिपल, बीबीएल
कोविड काल के बाद बच्चे स्कूल आना शुरू हुए तो उन्हें सामान्य होने में समय लगा। विद्यालय की ओर से तमाम ऐसे प्रयास किए गए कि बच्चे स्कूल में सामान्य रहें। उनके लिए समय-समय पर मनोरंजक गतिविधि कराई गई। काउंसलिंग भी हुई। अब बच्चे सामान्य हैं और कोविड आने से पहले के समय के हिसाब से उनकी दिनचर्या हो गई है।
- पारुष अरोड़ा, निदेशक, पद्मावती स्कूल