दवा किसी धर्म, संप्रदाय, जाति और वर्ग को नहीं बल्कि बीमार को रोगों से सुरक्षा प्रदान करती है। दुनिया में तबाही मचा रही कोरोना महामारी से बचाव के लिए टीका लगाना बेहद जरूरी है ताकि अगर कोई संक्रमण की चपेट में आ भी जाए तो जान जाने का खतरा न रहे। यह संदेश सभी धर्मगुरु अपने अनुयायियों के साथ पूरे समाज को दे रहे हैं।
कोरोना की पहली लहर के बाद वैक्सीनेशन की शुरुआत जनवरी 2021 में हुई थी। शुरुआत में वैक्सीन को लेकर कई भ्रांतियां थी जिसे दूर करने के लिए स्वास्थ्यकर्मी आगे आए और उन्होंने खुद वैक्सीन लगवाकर दूसरों को भी सुरक्षा कवच से लैस होने के लिए प्रेरित किया। हालांकि कई स्वास्थ्यकर्मियों ने भी वैक्सीन नहीं लगवाई। इसी बीच मार्च में दूसरी लहर हावी हो गई जिसमें करीब 30 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हुए। सरकारी आंकड़ों में करीब दो सौ लोगों की मौत हुई। महामारी की भयावहता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि ऑक्सीजन का भारी संकट खड़ा हो गया, अस्पताल में खाली बेड मिलना मुश्किल हो गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमित होने के बाद वैक्सीन तीन माह बाद ही लगवा सकते हैं। इसलिए बड़ी तादाद में लोग जिन्होंने पहली डोज लगवाई उन्हें दूसरी डोज लंबे समय बाद लगी। जो पहली डोज लगवाने से चूक गए वह गंभीर रूप से संक्रमण की चपेट में आए। दूसरी लहर थमने के बाद खौफ कहें या सक्रियता, टीकाकरण की गति बेहद तेज हो गई। एक ही दिन में 80 हजार से ज्यादा लोग वैक्सीनेट हुए।
धर्मगुरुओं ने किया वैक्सीन लगवाने का आह्वान
दूसरी लहर थमने के बाद सभी धर्म और संगठन आगे आए और उन्होंने अपने-अपने इलाकों, स्कूलों और धर्मस्थल के पास टीकाकरण शिविर लगवाने शुरू कर दिए। क्षेत्र के लोग जो भ्रांतियों के चलते वैक्सीन लेने से कतरा रहे थे, उन्हें वैक्सीन की खासियत बताई। 18 साल और इससे अधिक आयुवर्ग के सभी लोगों को अपनी मौजूदगी में वैक्सीन लगवाई। इसमें धार्मिक संगठनों ने अपनी भागेदारी निभाई थी। यह सिलसिला अब तक जारी है।
जरूर लगवाएं वैक्सीन
टीकाकरण को लेकर लोगों में कई भ्रांतियां थीं। जानकारी के अभाव में वे दूसरों को भी भ्रमित कर रहे थे। उन्हें वैक्सीन का महत्व बताकर टीकाकरण केंद्र तक पहुंचाया।
- योगी रवींद्र नाथ, गुरु गोरखनाथ आश्रम
चर्च से वैक्सीनेशन का सुझाव दिया जा रहा है। कोई इसे नजरंदाज न करे। कोरोना संक्रमण किसी को कहीं भी हो सकता है। वैक्सीन ही बचाव का जरिया है।
- डॉ. विलियम सैमुएल, पादरी इंटरडिपेंडेंट बैप्टिस्ट चर्च
पहले मैंने वैक्सीन लगवाई फिर आवाम की बेहतरी के लिए उन्हें वैक्सीन लगवाने को प्रेरित किया। यह मजहब की नहीं बल्कि समाज की भलाई के लिए है।
- शब्बू मियां नियाजी, प्रबंधक, खानकाह नियाजिया
वैक्सीन को लेकर सिख समाज खासा उत्साहित रहा। अब तक सौ फीसदी लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। आयुवर्ग के तहत बूस्टर डोज भी लग रही है।
- मालिक सिंह कालरा, सिख समाज सेवा सोसायटी