केंद्र पर किट उपलब्ध पर जांच नहीं
स्थानीय स्तर पर इलाज मुहैया कराने के लिए शहर में बने आरोग्य मंदिरों पर मलेरिया, डेंगू जांच के लिए आरडीटी किट मौजूद हैं, लेकिन स्टाफ के अभाव में जांच नहीं हो रही। किट धूल फांक रही हैं। विभाग के अनुसार जिले में 55 लैब टेक्नीशियन और 13 लैब असिस्टेंट हैं। सीएचसी, यूपीएचसी और पीएचसी पर तैनात हैं।
शहरी 34 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में लैब टेक्नीशियन या सहायक स्टाफ नहीं हैं। मरीज रेफर हो रहे हैं।जिला मलेरिया अधिकारी सत्येंद्र के मुताबिक स्क्रीनिंग में गर्भवती में संदिग्ध लक्षण मिलने पर मलेरिया जांच हो रही है। कई स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में मच्छरदानी नहीं लगी हैं।
30 अतिसंवेदनशील गांवों में सात दिन वार
मलेरिया, डेंगू रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अबकी बार अफसरों ने सात दिन मच्छरों पर वार माइक्रोप्लान बनाया है। मलेरिया अधिकारी के अनुसार मच्छरजनित रोगों के लिहाज से अतिसंवेदनशील 30 गांवों में सितंबर 2024 से जनवरी 2025 पांच माह मुहिम चलेगी। इनमें शेरगढ़, मीरगंज, भमोरा, फतेहगंज पश्चिमी के 6-6 गांव और मझगवां, बिथरी के 4-4 गांव शामिल हैं। यहां प्रतिदिन एंटी लार्वा और फॉगिंग होगी।
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि मलेरिया, डेंगू के संदिग्ध मरीजों को ट्रैक करने के लिए अब पहले से ज्यादा जांच हो रही है। इसलिए मरीज भी ज्यादा मिल रहे हैं। जिनका इलाज कराने के साथ फॉलोअप टेस्ट भी हो रहा है। ताकि पैरासाइट्स खत्म हो जाएं। हमारी सभी टीमें सक्रिय हैं। जो कमियां हैं, उसे दूर कराया जा रहा है।