शहर की प्रमुख सड़कों से ही कूड़ा नहीं उठ पा रहा है, गली-कूचों की बात ही अलग
बरेली। नगर निगम ने सफाई का बजट अलग-अलग मदों में 21 करोड़ रूपये का बजट रखा है। इसके बाद भी गलियों में कूड़ा नहीं उठ रहा है। सड़क किनारे कूड़े का ढेर लगा रहता है। नगर निगम ने बोर्ड बैठक में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन पर आठ करोड़, स्वच्छ भारत मिशन के तहत चार करोड़ और सफाई व नालों की सफाई पर साड़े नौ करोड़ रूपये का बजट रखा है। इसके बाद भी शहर में गंदगी के हालात जस के तस बने हुए हैं।
स्मार्ट सिटी की हर सड़क पर ही इन दिनों कूड़ा और गंदगी दिखाई पड़ रही है। नए शहर के कुछ हिस्सों को छोड़ दें तो बाकी शहर में कूड़ा और गंदगी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। लोगों का कहना है कि स्वच्छता की दौड़ में नगर निगम फरवरी में यूं ही नहीं पिछड़ था। अफ सर ही सफ ाई व्यवस्था की ओर से आंखे मूंदे हैं। कर्मचारी पूरी तरह मनमानी पर उतारू हैं। नगर निगम के अधिकारियों, जन प्रतिनिधियों और कर्मचारियों से शिकायतें करके थक-हार चुके शहर के लोग अब गंदगी से निजात मिलने की उम्मीद ही छोड़ चुके हैं। शहर में कूड़े के उठान की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। घरों से कूड़ा उठाने के लिए जो एजेंसियां लगाई गई हैं, वे भी ढंग से काम नहीं कर रही हैैं। सड़कों पर जमा कूड़ा तो कई-कई दिन नहीं उठ पाता है। ढेर जब ज्यादा ऊंचे हो जाते हैं तो कर्मचारी कूड़े में आग लगा देते हैं। शहर की प्रमुख सड़कों से ही कूड़े का उठान नहीं हो पा रहा है।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि रोजाना कूड़े का उठान किया जा रहा है। रात्रि सफाई भी हो रही है। फिर भी यदि किसी सड़क से कूड़ नहीं उठ रहा है तो वह पता कराएंगे और वहां से कूड़ा उठवाना सुनिश्चत करेंगे।