बाराबंकी। कोविड टीकाकरण को लेकर सरकार भले ही काफी गंभीर हो लेकिन जिम्मेदार इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यही कारण है कि जिले की 328 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनकी कोविड टीकाकरण में स्थिति खराब हैं। इस पर उच्चाधिकारी अपनी नाराजगी भी जता चुके हैं। इसके बाद भी स्थिति में सुधार होता दिखाई नहीं दे रहा है। शासन ने एक बार फिर राहत देते हुए 30 नवंबर की डेडलाइन निर्धारित कर दी है। कहा गया है कि इस अवधि तक सभी वयस्कों को टीका लग जाए। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिले में 1161 ग्राम पंचायतें हैं। वहीं इसमें नगर पंचायतों को भी मिला दिया जाए तो ग्राम पंचायतों की संख्या स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 1338 हो जाती है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी तक 375 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां पर 95 प्रतिशत लोगों को कोरोना के टीके लगाए जा सके। जबकि 460 पंचायतों में यह स्थिति 80 से 90 प्रतिशत के बीच है। वहीं 328 पंचायतें ऐसी हैं जहां पर अभी तक 80 प्रतिशत से भी कम लोगों को कोरोना के टीके लगाए जा सके। जिस पर उच्चाधिकारी नाराजगी भी जता चुके हैं और इसमें सुधार के आदेश दे चुके हैं।
इसके बाद भी जिम्मेदार इसको लेकर गंभीर नहीं दिखाई दे रहे हैं। जबकि शासन ने पहले सभी वयस्कों को 15 नवंबर तक टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया था लेकिन अब इसे बढ़ाकर 30 नवंबर तक सभी को टीका लगाए जाने की डेडलाइन निर्धारित करते हुए कहा कि अब इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस बाबत सीएमओ डॉ. रामजी वर्मा का कहना है कि शासन ने 30 नवंबर तक सभी को टीका लगाने की अवधि निर्धारित कर दी है। इसको लेकर सभी सीएचसी अधीक्षकों को माइक्रो प्लान बनाकर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। (संवाद)
सीडीओ ने भी जताई नाराजगी
टीकाकरण को लेकर सीडीओ एकता सिंह ने बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर समीक्षा की। इसमें 328 ग्राम पंचायतों में टीकाकरण की स्थिति ठीक न पाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सुधार के आदेश दिए। कहा कि निर्धारित अवधि के अंदर इन पंचायतों को कैसे संतृप्त किया जाएगा इसकी पूरी कार्ययोजना बनाकर शुक्रवार तक प्रस्तुत की जाए।
तीन लाख लोगों को लगना है टीका
जिले में 18 प्लस वालों की संख्या करीब 24 लाख है। इनमें से अभी तक 21 लाख लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा चुका है। जबकि 5 लाख लोगों को दूसरी खुराक भी लगाई जा चुकी है। महज तीन लाख लोग ही ऐसे हैं जिन्हें टीका नहीं लग सका है। जो लोग रह गए हैं उन्हें निर्धारित अवधि में टीका लगाने की तैयारी है।