कोटवाधाम (बाराबंकी)। अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर जगह-जगह हुए रेनकट ने तराई के लोगों की नींद उड़ा दी है। बांध पर पानी का दबाव और बढ़ तो इसके कटने का खतरा मंडराने लगा है। इससे बाढ़ खंड के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। वहीं नदी का पानी स्थिर होने से कटान का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। लेकिन बाढ़ खंड के अधिकारी इससे पूरी तरह से बेपरवाह हैं।
बाढ़ के पानी को पूरे क्षेत्र में फैलने से रोकने के लिए करोड़ों की लागत से अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर तेलवारी से लेकर सनावा गांव तक तटबंध बनाया गया। लेकिन भारी बारिश की वजह से इसमें कई जगह पर बड़े-बड़े रेनकट हो गए हैं जो बांध को धीरे-धीरे कमजोर कर रहे हैं। इससे बांध के कटने का खतरा मंडराने लगा है।
यदि बाढ़ का पानी बढ़ा तो बांध को बचाना आसान नहीं होगा। यहां के लोगों का कहना है कि बाढ़ से पहले इस तटबंध की मरम्मत के नाम पर लाखों खर्च कर सिर्फ और सिर्फ औपचारिकता निभा ली गई। यदि सही से कार्य किया गया होता तो बांध की ये हालत न होती।
तटबंध में आए रेनकट की सूचना से बाढ़ खंड के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है और इसे सही कराने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस बाबत एसडीएम सिरौलीगौसपुर सुरेंद्र पाल विश्वकर्मा ने बताया कि अलीनगर रानीमऊ तटबंध में रेनकट की सूचना बाढ़ खंड को दे दी गई है और जल्द से जल्द मरम्मत के लिए कहा गया है। बारिश के वजह से तराई के लोगों को दिक्कतें हो रहीं है जिन्हें दूर करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
जलस्तर स्थिर, बढ़ा कटान का खतरा
सरयू का जलस्तर एक बार फिर खतरे के निशान के करीब पहुंचकर स्थिर हो गया है। मगर क्षेत्र में दो दिन हुई तेज बारिश से लोगों के घरों में अभी भी पानी भरा हुआ है। बाढ़ क्षेत्र के बघौलीपुरवा, टेपरा, सरायसुर्जन तेलवारी, कहरानपुरवा, नव्वनपुरवा, मझरायपुर सनावा आदि गांव में नदी का पानी भले ही नहीं आया हो मगर यहां पर बारिश से बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं और अब कटान का भी खतरा बढ़ने लगा है। कई गांवों के संपर्क मार्गों का संचालन आज भी नहीं हो पाया है। पूरे तराई क्षेत्र में हर तरफ जलसैलाब ही दिखाई दे रहा है।
कोई सुध लेने तक नहीं आया
यहां के हरिशंकर पांडेय, पवन, मिताई, अकबाल सिंह ने बताया कि पूरे क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात है लेकिन कोई अधिकारी हम लोगों की सुध तक लेने नहीं आया है। जिससे हम लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हर तरफ पानी भरा होने की वजह से अब दो वक्त की रोटी का संकट भी खड़ा होने लगा है।