बाराबंकी। समूह की महिलाओं द्वारा तैयार गुणवत्तायुक्त पुष्टाहार खाकर आंगनबाड़ी के बच्चे सेहतमंद होंगे। कंपनी को मिलने वाला मुनाफा समूह को मिलेगा। इससे समूह की महिलाओं को रोजगार मिलेगा। इसको लेकर 24 सौ महिला समूहों की 30-30 हजार रुपये की भागीदारी से आने वाली करीब सवा सात करोड़ की धनराशि से आठ ब्लॉकों में टेक होम राशन प्लांट स्थापित होंगे। इसको लेकर ब्लॉक व भूमि का चयन कर लिया गया है, प्रशासन ने इसके लिए भूमि भी उपलब्ध करा दी है।
आंगनबाड़ी केंद्रों के नौनिहालों को दिए जाने वाले पुष्टाहार की सप्लाई अभी तक सरकार द्वारा नामित कंपनी करती थी। ऐसे में एक्सपायरी तिथि के घटिया पुष्टाहार की सप्लाई होने से पुष्टाहार में कीड़े आदि पड़ जाते थे। ऐसे में पुष्टाहार के प्रोडक्शन की जिम्मेदारी अब राष्ट्रीय आजीविका मिशन के महिला समूहों को दिए जाने की योजना है।
इसके लिए जिले के आठ ब्लॉक निंदूरा, पूरेडलई, सिरौलीगौसपुर, बनीकोडर, हैदरगढ़, सिद्धौर, मसौली व सूरतगंज में टेक होम राशन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक प्लांट में तीन-तीन सौ महिला समूहों की भागीदारी होगी। प्रत्येक समूह पहले 30-30 हजार रुपये लगाएंगे। इसके बाद होने वाले मुनाफे को सभी बराबर हिस्से में बांट लेंगे।
आठ प्लांटों में सात में दो-दो ब्लॉक के महिला स्वयं सहायता समूह शामिल किए जाएंगे। इसमें निंदूरा के साथ देवा, पूरेडलई के साथ दरियाबाद, सिरौलीगौसपुर में रामनगर, हैदरगढ़ में त्रिवेदीगंज, सिद्वौर के साथ हरख, सूरतगंज के साथ फतेहपुर व बनीकोड़र ब्लॉक के समूहों के अपने प्लांट होंगे।
प्रत्येक प्लांट पर समूह की 20 महिलाओं को मिलेेगा काम
जिले में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के 11 हजार 277 महिला स्वयं सहायता समूह है। इसमें से इस काम में करीब 24 सौ महिला समूह अपनी भागीदार कर स्वरोजगार की मुख्य धारा से जुड़कर मुनाफा कमाएंगे। प्रत्येक प्लांट पर पुष्टाहार के प्रोडक्शन के काम के लिए समूह की 20 महिलाओं को काम मिलेगा। इसको लेकर होने वाले मुनाफे से ही उनको आठ-आठ हजार रुपये का मानदेय मिलेगा। ऐसे में आठ प्लांट पर करीब 160 महिलाओं को नियमित काम मिलेगा।
समूह की महिलाओं को रोजगार की मुख्यधारा से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी के प्रयास से आठ ब्लॉकों में टेक होम राशन प्लांट स्थापित करने की तैयारी है। इसको लेकर भूमि व ब्लॉकों का चयन कर लिया गया है। प्रत्येक प्लांट में तीन-तीन सौ महिला स्वयं सहायता समूहों की 30-30 हजार रुपये की भागीदारी से इसे तैयार किया जाना है। जो आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए पुष्टाहार का प्रोडक्शन करेंगी। इससे मिलने वाला मुनाफा समूहों में बराबर बांट दिया जाएगा।
- बीके मोहन, डीसी स्वत: रोजगार