बाराबंकी। जिला योजना समिति की पिछले वर्ष मार्च 2020 में हुई बैठक में प्रस्तावित 445 करोड़ रुपये से विकास कार्यों पर मुहर लगी थी। इसमें एक करोड़ से 20 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 14 करोड़ की लागत से सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण शामिल थे लेकिन कई सीएचसी, पीएचसी का निर्माण नहीं हो सका। वहीं शहर में पेयजल व्यवस्था के लिए प्रस्तावित किए 250 हैंडपंप भी नहीं लग सके। विभागीय अधिकारी बजट के आधार पर विकास कार्य कराने की बात कह रहे हैं।
प्रभारी मंत्री दारा सिंह चौहान की अध्यक्षता में वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 7 मार्च 2020 को कलेक्ट्रेट के गांधी सभागार में बैठक हुई थी। इसमें शासन द्वारा प्रस्तावित किए गए 445 करोड़ की राशि स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, शिक्षा समेत कई विभागों की योजनाओं पर खर्च की जानी थी। जिससे जिले वासियों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सके। लेकिन प्रस्तावित बजट में से पूरे वित्तीय वर्ष में 232 करोड़ 64 लाख 32 हजार (52.27 प्रतिशत) ही बजट अवमुक्त हुआ।
इसके आधार पर कुछ कार्य कराए गए। वहीं कुछ कार्यों का शुभारंभ तक नहीं हो सका। इस मामले में सबसे आगे स्वास्थ्य विभाग रहा। जिला योजना की बैठक में पास किए गए विकास कार्य में एक करोड़ की लागत से त्रिवेदीगंज ब्लॉक के कोरियानी, सेमरावां और मोहम्मदपुर गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो मेडुवा, देवीगंज, लालपुर करौता, मंगरौड़ा, जलुहामऊ, सिसवारा और इंटौरा गांवों में सीएचसी की स्थापना के लिए 14 करोड़ रुपये प्रस्तावित हुए थे लेकिन बजट न मिलने से इनका निर्माण नहीं हो सका और क्षेत्रवासियों को इनका लाभ नहीं मिल सका।
वहीं शहरी क्षेत्रों में बेहतर पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 9 करोड़ 31 लाख की लागत से 250 हैंडपंप लगाए जाने थे। वहीं 150 पुराने हैंडपंपों को रिबोर करना था। इसके अलावा, सुबेहा, बंकी, हैदरगढ़ में एक-एक पंपहाउस के साथ सुबेहा, सतरिख और नगर पालिका की कांशीराम कॉलोनियों में भी पेयजल की बेहतर व्यवस्था करनी थी लेकिन प्रस्तावित पूरा बजट न मिलने से जितना काम होना था। उतना नहीं हो सका। अब देखना है इस बार प्रस्तावित बजट में से जिले को कितना बजट मिलता है।