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धान बेचने वाले सवा तीन सौ किसानों का फंसा पांच करोड़

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बाराबंकी। गेहूं खरीद शुरू हो चुकी है लेकिन धान बेचने वाले करीब सवा तीन सौ किसानों का लगभग पांच करोड़ रुपये का भुगतान फंस गया है। खरीद बंद हुए एक माह बीत जाने के बाद भी किसानों के खाते में अभी तक पैसा नहीं पहुंचा है। किसान पैसा पाने के लिए विभाग और बैंक के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है। विभागीय अधिकारी इसे प्रपत्रों में त्रुटि बता हाथ खड़े कर रहे हैं।
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किसानों से धान की खरीद के लिए जिले में इस बार 65 धान खरीद केंद्र खोले गए थे। इन केंद्रों के माध्यम से 28 फरवरी तक करीब 30 हजार 494 किसानों से करीब एक लाख 59 हजार 573 एमटी धान की खरीद की गई। मगर इनमें से करीब सवा तीन सौ किसान ऐसे हैं जिनका करीब पांच करोड़ रुपये का भुगतान आज तक नहीं हो सका है।
ये किसान अपने भुगतान के लिए विभाग और बैंकों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है। विभाग के जिम्मेदार भी बैंक पासबुक और नाम मिसमैच आदि की बात बता अपने हाथ खड़े कर रहे हैं। विभाग की माने तो बैंक पासबुक में नाम कुछ और है, आधार कार्ड पर कोई और नाम लिखा है तथा खतौनी पर कुछ और दर्ज है।
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इसकी वजह से इन किसानों के खाते में पैसा नहीं पहुंच पा रहा है। जिस दौरान किसानों ने धान बेचा उस समय यदि केंद्र प्रभारियों ने इस बात को गंभीरता से लिया होता तो शायद किसानों के सामने आज यह संकट न खड़ा होता और अब तक उनके खाते में पैसा पहुंच चुका होता।
मगर केंद्र प्रभारियों ने इन त्रुटियों को पूरी तरह नजरंदाज कर दिया। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। जबकि जिले में गेहूं की खरीद भी शुरू हो चुकी है। धान का भुगतान न होने के कारण ज्यादातर किसान गेहूं लेकर सरकारी क्रय केंद्रों पर आने से कतरा रहे हैं।
किसानों ने केंद्र प्रभारियों पर लगाए आरोप
किसानों का आरोप है कि केंद्र प्रभारियों ने किसानों का धान तौलने के बजाए राइस मिल वालों के पेपर चढ़ाने में खूब रुचि दिखाई। क्योंकि राइस मिल वालों ने केंद्र प्रभारियों पर धान की कुटाई करने का इतना ज्यादा दबाव बना दिया था कि जिले में सबसे ज्यादा पेपर राइस मिल वालों के ही चढ़ाए गए।
इसका खामियाजा आज किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसानों का यह भी आरोप है कि जिले में करीब जनवरी के बाद किसानों से धान की खरीद बंद हो गई। इसके बाद भी सैकड़ों क्विंटल धान की खरीद हुई है। जबकि हकीकत में ये खरीद राइस मिल वालों के पेपर चढ़ाकर की गई।
प्रपत्रों में त्रुटि के कारण धान बेचने वाले जिले के करीब सवा तीन सौ किसानों के खाते में अभी तक पैसा नहीं पहुंच सका है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रपत्रों को सही कराकर किसानों के खाते में पैसा भेजवाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
-रमेश कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
गेहूं के लिए किसानों से संपर्क करें प्रभारी
बाराबंकी। गेहूं खरीद के दूसरे दिन भी एक दाना गेहूं नहीं खरीदा जा सका। जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने शनिवार को भी कई गेहूं खरीद केंद्रों का निरीक्षण किया और केंद्र प्रभारियों से किसानों से संपर्क करने तथा उन्हें सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं लाने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही। जिला खाद्य विपणन अधिकारी रमेश कुमार ने शनिवार को हैदरगढ़, त्रिवेदीगंज, सिद्धौर और हरख में खुले गेहूं खरीद केंद्रों का निरीक्षण किया। यहां पर केंद्र प्रभारी तो मौजूद मिले लेकिन कोई किसान ऐसा नजर नहीं आया जो गेहूं लेकर आया हो।
जानकारी करने पर केंद्र प्रभारियों ने बताया कि अभी बाजार में गेहूं की उतनी आवक नहीं है जितनी उम्मीद की जा रही है। इस पर जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने केंद्र प्रभारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी प्रभारी अपने आसपास के गांवों में जाकर किसानों से संपर्क करें और उन्हें सरकारी केंद्रों पर गेहूं लाने के लिए प्रोत्साहित करें। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। संवाद
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