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शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ेंगे 1900 बालश्रमिक

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बाराबंकी। ककहरा सीखने की उम्र में काम पर भेज दिए गए नौनिहालों में से 1900 बच्चों एक संस्था ने छह माह के सर्वे के दौरान चिह्नित किए हैं। इनको शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए दो वर्ष में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के तहत विशेष शिक्षा केंद्र खोले जाएंगे। इन केंद्रों पर कक्षा पांच तक की पढ़ाई होगी।
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ामिक के रूप में चिह्नित किए गए ये नौनिहाल ढाबों, होटल व ऑटोमोबाइल की दुकान से लेकर ईंट भट्टा पर मजदूरी कर रहे थे। इनकी पारिवारिक स्थिति काफी दयनीय बताई जाती है।
भारत सरकार द्वारा नामित उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल कंसलटेंट लिमिटेड नामक संस्था ने मार्च से अगस्त 2021 तक जिले भर में सर्वे अभियान चलकर छह से 14 वर्ष तक के उन श्रमिकों को चिह्नित किया है जिन्हें इस उम्र में स्कूल में होना चाहिए। मामूली मजदूरी पर काम करने वाले इन बच्चों को दो वर्ष में कक्षा पांच तक की शिक्षा दिलाकर शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए जिले भर में विशेष शिक्षा केंद्र बनाए जाएंगे।
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यही नहीं इन्हें प्रतिमाह चार सौ रुपये वजीफा, ड्रेस, पुस्तकें और भोजन भी मिलेगा। यह अभियान पहले भी चलता रहा है किंतु बाल श्रमिकों की संख्या घटने की बजाय बढ़ती ही गई। करीब दो वर्ष पहले जिले में 654 बच्चों को चिह्नित कर शिक्षा दी गई थी।
जिले में बच्चों की क्षेत्रवार उपलब्धता के आधार पर विशेष शिक्षा केंद्र खोले जाएंगे। इसके लिए स्वयंसेवी संस्थाओं का सहारा लिया जाएगा। यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों को मानदेय देने से लेकर शिक्षा केंद्र के संचालन तक का पूरा खर्च श्रम विभाग उठाएगा। वर्ष 2018 में जिले में 22 केंद्र खोले गए थे।
राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना के प्रोग्राम मैनेजर अंकित श्रीवास्तव ने बताया कि श्रम में लगे 1900 बच्चों की सूची नामित संस्था द्वारा उपलब्ध कराई गई है। जिसे भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड किया गया है। जल्द ही विशेष शिक्षा केंद्र का भी चयन पूरा कर लिया जाएगा।
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