बाराबंकी। लगातार बढ़ रही घाघरा भले ही खतरे के निशान तक पहुंचते-पहुंचते थम गई। जिले के आधा दर्जन गांव में बाढ़ का पानी घुसने से दुुश्वारियां बढ गई हैं। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे है। स्थिति का आकलन करने प्रदेश सरकार की बाढ मंत्री स्वाती सिंह दोपहर बाद बाढ़ पीड़ित इलाके का निरीक्षण करने पहुंचीं। बाढ़ से निपटने के लिए की गई तैयारियों का जायजा लिया। इस मौके पर डीएम एसपी के अलावा बाढ़ व राहत कार्य से जुड़ा सरकारी अमला भी मौजूद रहा। शाम को मंत्री ने रामनगर कस्बे में स्थित लोक निर्माण विभाग के बंगले में अधिकारियों के बैठक कर बाढ़ से निपटने की तैयारी के बारे में समीक्षा की और बाढ़ से निपटने की हर तैयारी पहले से पूरी करने के निर्देश दिए। यहां पर मंत्री ने कहा कि चरसड़ी बांध तकनीकी खामियों के चलते बह गया था। जिसकी जांच चल रही है। इसके दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
घाघरा का जलस्तर गुरुवार को खतरे के निशान से 23 सेंटीमीटर दूर रहा। घाघरा के उस पार तराई रायपुर मांझा गांव के पानी में डूबने से ग्रामीण अपना सामान लेकर बंधे पर पहुंच अपना ठिकाना बनाने में लगे रहे। वहीं डाउन स्ट्रीम में बने अलीनगर-रानी मऊ बांध बाढ़ का दबाव पड़ने लगा। जिसे बचाने के लिए बाढ़ खंड के अधिकारी कोठरी गौरिया पहुंच कटरों पर पैचिंग का काम शुरू कराया। बाढ़ का कटाव काफी गहराई से होने की संभावना को लेकर बांध के किनारे बम्बू कैरेट भी डाले गए। अलीनगर रानीमऊ तटबंध के करोनी गांव के पास घाघरा ने कटान शुरू कर दी। खेतों को काटकर घाघरा गांव की तरफ बढ़ रही है। नदी के मुहाने पर बसे कोठरीगौरिया गांव में कटान का सबसे अधिक खतरा है। शुक्रवार को बाढ़ खंड के जेई शैलेश कुमार द्वारा यहां पर बांध को बचाने के लिए बचाव कार्य तो कराए गए।
बाढ़ के बाद दूसरी जगह पर बनेगा बांध : स्वाति
रामनगर (बाराबंकी)। बाढ़ मंत्री स्वाती सिंह ने कहा कि एल्गिन चरसड़ी बांध कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए गलत जगह पर बना दिया गया था। बाढ़ से निपटने के बाद बांध अब सही स्थान पर बनाया जाएगा। जिससे बार-बार कटने की हालात से छुटकारा पाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि बांध के निर्माण में जिन लोगों ने धांधली की है। उन्हें बक्सा नहीं जाएगा। बांध का निरीक्षण कर वापस लौटी मंत्री स्वाति सिंह ने रामनगर गेस्ट हाउस में पत्रकारों से वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा बांध सुरक्षा के लिए जो कार्रवाई होनी थी वह हो चुकी है जहां पर पानी भर गया था उन लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है खाने पीने की पूरी व्यवस्था हो गयी है। आश्वस्त कर रही हूं कोई जन धन की हानि नही होगी। जिन्होंने बाढ़ के नाम पर धंधा बना रखा था उनका धंधा समाप्त हो चुका है नया बांध बाढ़ के बाद दूसरी जगह बनेगा। बांध ही नही जितनी परियोजनाओं की जांच चल रही है, कुछ की रिपोर्ट आ गयी है दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी यह बांध तकनीकी रूप से गलत बना है। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक शरद अवस्थी, सतीश शर्मा, उपेन्द्र रावत, जिला अध्यक्ष अवधेश श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
तलहटी के गांवों में कहर ढाने लगी नदी
टिकैतनगर (बाराबंकी)। तेजी से बढ़ रही घाघरा की रफ्तार भले ही थम गई हो। मगर, उसका कहर तलहटी में बसे गांवों में जारी हो गया है। जिससे घाघरा के उस पार तराई में बसे रायपुर मांझा, परसावल, नैपुरा, कमियार, गोपीपुरवा, बांसगांव तक पहुंचा घाघरा का पानी लोगों के घरों में घुस गया है। जिससे सहमे ग्रामीण अपना घर छोड़कर गृहस्थी का सामान बटोरकर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं। नैपुरा के प्राथमिक विद्यालय को घाघरा ने चारों तरफ से घेर लिया है।
बाढ़ पीडित हनुमत, दृगपाल, देवीदयाल, रामदुलारे, राजवंती, फूलमता, नकछेद, आदि ने बताया कि गांव में पानी भरने से मुसीबत बढ़ गई है। तटबंध पर मवेशियों व परिजनों को पहुंचाया गया है। बताया कि अभी तक गांव में सिर्फ दो नावें ही लगाई गई हैं। जिन पर अपना सामान लादकर गांव के लोग तटबंध पर पहुंच रहे हैं। इनके पास सिर छुपाने के लिए कोई जगह नही बची है। रायपुर व परसावल के पास लगी फसलें भी पानी में डूब गई हैं। जिससे ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ गई हैं। मगर, प्रशासन की ओर से अब तक बाढ़ से बचाव व राहत के कोई प्रबंध इन गांवों में नहीं दिख रहे है। ग्रामीणों को सुरक्षित गांव से निकालने के लिए नावों की व्यवस्था भी सुचारु रूप से नहीं हो पाई है। रायपुर निवासी लल्ला ने बताया कि गांव में दो नावें लगाई गई हैं। जिनसे घंटों इंतजार के बाद एक-एक कर ग्रामीण अपनी गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं। बाढ़ क्षेत्र में बाढ़ चैकिया कहां बनाई गई हैं। इन पर कौन से कर्मचारी तैनात हैं। यहां के ग्रामीणों को इसकी भी जानकारी नहीं है। पानी में डूबे हैंडपंपों के अलावा पानी की व्यवस्था प्रशासन ने नहीं की है।