Vrindavan is the conscience of the devotee
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बांदा/कमासिन। आवास विकास कालोनी मंदिर कुआं में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथा व्यास भरत बाजपेयी ने कहा कि भक्त का अत:करण ही वृंदावन है। जहां पर आत्मा रूपी गोपियां श्रीकृष्ण के साथ रास रचाने को व्याकुल रहती हैं।
कहा कि वृंदावन की कुंजगलियों में नंद के नंदन आज भी नित्य रास रचाते हैं। यहां की वनस्पतियां भी नृत्य करती हुई गोपियों जैसा पूर्ण समर्पण चाहिए। परमात्मा ने हमें दिल और दिमाग दिया है। मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार चारों एक होकर ईश्वर को समर्पित हो जाते हैं।
तब परमात्मा जीव को सहज सुलभ हो जाता है। जैसे की श्रीकृष्ण गोपियों के हो गए। इसके अलावा उन्होंने कंस वध, रुक्मिणी व श्रीकृष्ण विवाह की कथा सुनाई। श्रद्धालुओं ने पैर पुजाई की। यजमान हरी प्रसाद गुप्त आदि आसपास के सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
उधर, कमासिन में श्रीमद्भागवत कथा की कलश यात्रा के साथ शुरुआत हुई। कथा व्यास आचार्य जनार्दन मिश्र श्रीधाम वृंदावन ने कहा कि भागवत कथा श्रवण मात्र से जगत के समस्त प्राणियों का कल्याण होता है।
सांसारिक सुखों को पाकर मानव को भागवत भजन सत्संग करना चाहिए। जिला पंचायत सदस्य मयंक द्विवेदी, किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष इंद्रेश द्विवेदी, ग्राम प्रधान कौशल नरेश द्विवेदी आदि श्रद्धालु व महिलाएं सिर पर कलश लिए मौजूद रही।