बांदा। उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र में भूखंड घोटाले की साढ़े तीन वर्ष बाद दर्ज हुई रिपोर्ट में नामजद आरोपी विभागीय सहायक आयुक्त सर्वेश कुमार दीक्षित की गिरफ्तारी से ठंडे बस्ते में पड़ा यह मुद्दा गरमा गया है।
सहायक आयुक्त पर एक करोड़ 24 लाख 62 हजार 687 रुपये के छह भूखंड फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने का आरोप है। मूल रूप से लखीमपुर खीरी जनपद के रहने वाले सर्वेश कुमार दीक्षित यहां जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र में सहायक आयुक्त (उद्योग) के पद में तैनात थे।
आरोप हैं कि सहायक आयुक्त ने फर्जी हस्ताक्षर और नकली दस्तावेजों के आधार पर वर्ष 2017-18 में जिला उद्योग केंद्र परिसर में स्थित 50 हजार वर्ग फीट के भूखंड रजिस्ट्री करके आवंटित कर दिए। इस पर प्रदेश के आयुक्त एवं उद्योग निदेशक ने फरवरी 2019 में आवंटन कार्रवाई निरस्त कर दी।
भूखंडों का यह आवंटन जिला स्तरीय उद्योग बंधु समिति की ओर से अनियमित रूप से कराया गया था। इस बीच अप्रैल 2019 में आरोपी सर्वेश कुमार दीक्षित का यहां से सीतापुर के लिए तबादला हो गया। आवंटन निरस्तीकरण के बाद मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।
उधर, शासन ने जांच के बाद 8 मई 2020 को आरोपी सर्वेश कुमार दीक्षित को बर्खास्त कर दिया। रिपोर्ट दर्ज होने के करीब ढाई महीने बाद कोतवाली पुलिस ने सर्वेश को बांदा रोडवेज बस अड्डे से गिरफ्तार कर लिया।
हालांकि, गिरफ्तारी लखनऊ में होने की चर्चा है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि बर्खास्तगी के खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे आदेश लेकर यहां ज्वाइन करने आया था। तभी इसे गिरफ्तार कर लिया गया।
जिला अस्पताल में मेडिकल और कोरोना जांच के बाद मंगलवार को जेल भेज दिया गया। इस केस के विवेचक मर्दननाका चौकी प्रभारी उप निरीक्षक रमाकांत शुक्ल द्वारा किया जाना बताया गया है।
ये था मामला---
ढाई माह पूर्व 15 जून 2021 को उद्योग केंद्र के मौजूदा प्रभारी उपायुक्त मोहम्मद जहीरुद्दीन सिद्दीकी ने शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर दी।
इसमें कहा गया कि तत्कालीन सहायक आयुक्त सर्वेश ने लगभग 50 हजार वर्ग फीट रिक्त पड़ी उद्योग केंद्र कार्यालय की भूमि को फर्जी तरीके से अपने पक्ष में पत्र तथा शपथ पत्र बनाकर आयुक्त उद्योग बांदा रामविलास बाजपेयी के फर्जी हस्ताक्षर करके और उपायुक्त उद्योग की मोहर लगाकर भूखंडों की अवैध तरीके से रजिस्ट्री कर दी, जबकि सहायक आयुक्त को यह अधिकार प्राप्त नहीं था।
इस तहरीर के आधार पर 17 जून 2021 को शहर कोतवाली में बर्खास्त सहायक आयुक्त सर्वेश कुमार दीक्षित के विरुद्ध धारा 420,467,468,471 आईपीसी में रिपोर्ट दर्ज कर ली।
हस्ताक्षर अपने, मोहर उपायुक्त की
प्रभारी उपायुक्त द्वारा दर्ज कराई रिपोर्ट में तत्कालीन सहायक आयुक्त सर्वेश कुमार दीक्षित पर फर्जी हस्ताक्षर से अपने पक्ष में शपथ पत्र प्रस्तुत करने, अधिकार न होते हुए भी भूखंडों की रजिस्ट्री करने, अपने हस्ताक्षर के नीचे उपायुक्त उद्योग की मोहर लगाने के आरोप हैं।
इन्हें आवंटित किए गए भूखंड---
1-प्रीति गुप्ता पत्नी अजीत कुमार गुप्ता, (श्रीनाथ विहार, बांदा) : भूखंड संख्या- डी-1, क्षेत्रफल 404.20 वर्ग मीटर, भूखंड संख्या- डी-2, क्षेत्रफल-452.46 वर्ग मीटर, भूखंड संख्या- डी-3, क्षेत्रफल- 396.16 वर्ग मीटर।
2-संतोष कुमार मिश्रा पुत्र रामनारायण (ग्राम भुईली पांडे, मिर्जापुर) : भूखंड संख्या- डी-4, क्षेत्रफल-447.01 वर्ग मीटर।
3-मुन्नी देवी पत्नी स्व. जयराम सविता (ग्राम गुरदहा, हमीरपुर): भूखंड संख्या- डी-5, क्षेत्रफल- 446.96 वर्ग मीटर।
4-अमृता तिवारी पत्नी आशुतोष तिवारी (खूंटी चौराहा, बांदा), पार्टनर रचना त्रिपाठी पत्नी नारायण (ग्राम करहिया, हमीरपुर), भूखंड संख्या- डी-6, क्षेत्रफल- 394.32 वर्गमीटर।
डीएम के आदेश पर समिति ने की थी जांच
आवंटित भूखंडों के बारे में जिला उद्योग केंद्र के सहायक प्रबंधक रामचंद्र राम द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया कि तत्कालीन डीएम ने 2 जून 2019 को इस प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित की थी।
समिति ने चार दिसंबर 2019 को दी अपनी जांच रिपोर्ट में कहा कि उद्योग केंद्र की खाली पड़ी भूमि (प्लाट डी-1 से डी-6 तक) किया गया आवंटन अनियमित और अवैध था। समिति ने कहा कि बांदा विकास प्राधिकरण महायोजना- 2021 में यह प्रश्नगत भूमि का भू उपयोग कार्यालय के लिए निर्धारित है।
अत: इसे आवंटित किया जाना नियम विरुद्ध है। समिति ने आवंटन को निरस्त करने की संस्तुति की। अपर मुख्य सचिव ने दो अक्तूबर 2020 तथा 17 फरवरी 2021 को शासन में हुई बैठक में इन भूखंडों का आवंटन तत्काल निरस्त करने के निर्देश दिए।
आरोपी ने आरोपों को किया खारिज
गिरफ्तारी के बाद आरोपी सर्वेश दीक्षित ने यहां शहर कोतवाली में मीडिया से कहा कि पुलिस पर उसे पूरा भरोसा है। पुलिस ने हमेशा सहयोग किया। भूखंडों के बाबत कहा कि वह उद्योग केंद्र के न तो अधिकारी थे और न उनके पास वित्त के अधिकार थे।
प्रदेश के सभी जनपदों में भूखंडों के आवंटन होते रहते हैं। कार्यालय के जूनियर अधिकारी होने के नाते अफसरों के निर्देशों का पालन करते हैं। जमीन मैंने नहीं बेची। सिर्फ आदेशों का पालन किया। लखनऊ हाईकोर्ट ने सारे आरोप खारिज कर दिए हैं।
विधायक पर साजिश का फोड़ा ठीकरा
पुलिस हिरासत में आरोपी सर्वेश दीक्षित ने खुद का फंसाए जाने का सारा ठीकरा विधायक प्रकाश द्विवेदी पर फोड़ा। कहा कि उनका हाथ है। हाईकोर्ट ने 9 अगस्त 2021 को उन्हें सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया है। विधायक षड्यंत्र कर उसे फंसाया है।
कहा कि जब वह यहां तैनात था, तब विधायक ने अपने आवास में बुलाकर एक प्लाट एक व्यक्ति को देने को कहा था। मैंने मना कर दिया था। इस पर विधायक ने उन्हें जूता मारा था। मैंने यह बात उच्चाधिकारियों को बताई थी। मैंने यहां से ट्रांसफर करा लिया, लेकिन विधायक पीछे पड़े रहे।
व्यापारियों की शिकायत पर शासन को लिखा
गिरफ्तार आरोपी सर्वेश दीक्षित द्वारा उन पर लगाए गए आरोप चोरी और सीनाजोरी हैं। उद्योग केंद्र परिसर की भूमि गुपचुप ढंग से आवंटित की जा रही थी। व्यापारियों ने उनसे शिकायत की। जनप्रतिनिधि होने के नाते व्यापारियों की शिकायत पर शासन को जांच को पत्र भेज दिया।
आरोप गलत होते तो विभागीय जांच के बाद सहायक आयुक्त की बर्खास्तगी क्यों होती। आरोपी सर्वेश कभी उनके बांदा आवास नहीं आया। अलबत्ता मामला रफा-दफा करने के लिए लखनऊ में उनसे मिलने का प्रयास किया, जिसको भगा दिया। हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है तो पुलिस को क्यों नहीं आदेश दिखा रहा है।
- प्रकाश द्विवेदी, सदर विधायक