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रोडवेज बसें हुईं बंद तो निजी बसों ने मचाई लूट

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ओरन में यात्रियों को लेकर जाती प्राइवेट बस। संवाद - फोटो : BANDA
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अतर्रा। रोडवेज की बसें बंद होने का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें मात्र 13 किलोमीटर दूर अतर्रा-बिसंडा का किराया 30 रुपये अदा करना पड़ रहा है। रोडवेज इस रूट पर जहां यात्रियों की कमी बता रहा है वहीं निजी बसें व डग्गामार वाहन रोजाना लाखों रुपये कमाकर यात्रियों के साथ लूट मचाए हैं। दबंगों, माफियाओं और रसूख वालों की निजी बसों के कर्मचारी यात्रियों से दबंगई और बदसलूकी करने से भी नहीं चूकते।
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कोरोना लॉकडाउन के बाद रोडवेज ने बांदा-ओरन-बिसंडा आदि रूटों पर चार बसें बंद कर दी थी, अब इस रूट पर सिर्फ एक बस चल रही है। जबकि अतर्रा से बिसंडा और बबेरू मार्ग में 25 गांव और 40 मजरे जुड़े हैं। यहां के सैकड़ों ग्रामीण और व्यापारी रोजाना अतर्रा और बिसंडा बाजार करने तथा अन्य कामों से आते-जाते हैं। अतर्रा से बिसंडा की दूरी सिर्फ 13 किलोमीटर है, लेकिन प्राइवेट बस 30 रुपये किराया वसूल रही हैं।
इन निजी बसों की धमाचौकड़ी और उनमें यात्रियों की मारामारी सुबह 5 बजे से शुरू हो जाती है। लगभग हर घंटे निजी बस या कोई डग्गामार वाहन यात्रियों से खचाखच भरकर फर्राटे मारता है। बबेरू का किराया अतर्रा से 45 रुपये वसूल रहे हैं। यात्रियों द्वारा आपत्ति जताने पर बस मालिकों के गुर्गे उनके साथ खुले आम दबंगई और अभद्रता करते हैं। अक्सर यात्रियों को बीच रास्ते में उतार देते हैं।
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भाजपा और सपा नेताओं ने रोडवेज बसें मांगीं
अतर्रा। अतर्रा से बिसंडा-बबेरू होकर कानपुर के लिए मात्र एक रोडवेज बस सुबह चलती है। बाकी दिनभर यात्री निजी बसों या डग्गामार वाहनों के हवाले रहते हैं। सपा नेता बिजेंद्र गौतम, छात्र संघ पूर्व अध्यक्ष विवेक बिंदु तिवारी, भाजपा नेता विनोद द्विवेदी व बालेंद्र तिवारी आदि का कहना है कि रोडवेज बसें न होने से यात्रियों को निजी बसों के शोषण का शिकार होना पड़ रहा है। इस रूट पर तत्काल पर्याप्त रोडवेज बसें चलाई जाना चाहिए।
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