बांदा। गुणवत्ता की बानगी कही जाने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना भी कमीशनबाजी और घटिया निर्माण के हथकंडे से नहीं बच सकी। झांसी-मिर्जापुर नेशनल हाईवे पर इस योजना से लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से बनी 17 किलोमीटर सड़क सात महीने में ही ध्वस्त हो गई। खास बात यह है कि यह सड़क सत्तादल के स्थानीय विधायक के पैतृक गांव के नजदीक है।
झांसी-मिर्जापुर नेशनल हाईवे से अतर्रा-बिसंडा रोड वाया छिबांव, मकरी, नाई, दुरईमाफी, सिकलोढ़ी गांवों से होती हुई 17 किलोमीटर लंबी सड़क का प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से मौजूदा वर्ष 2021 में निर्माण हुआ था। इसे कार्यदाई संस्था ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) से इटावा की एक फर्म ने बनाया था।
पांच वर्ष तक सड़क का रखरखाव करने के लिए 99. 25 लाख स्वीकृत हुए थे। निर्माण कार्य पूरा होने पर शुरुआत में चमकती-दमकती नजर आने वाली सड़क पहली ही बारिश नहीं झेल सकी। कई स्थानों पर इसकी धज्जियां उड़ गई हैं। गोकुल पुरवा व पुनाहुर गांवों से सिकलोढ़ी गांव के बीच यह सड़क कई स्थानों पर ध्वस्त हो गई है। इसे लेकर कार्यदाई संस्था और संबंधित ठेकेदार पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता रजनीश कुमार का कहना है कि सड़क अभी निर्माणाधीन है। इस सड़क के बगल से ही ढाई किलोमीटर लंबी सड़क पीडब्ल्यूडी ने बना दी, जिससे यहां ओवरलोड ट्रक निकलने लगे। उन्हीं से सड़क खराब हुई है। संबंधित ठेकेदार को सड़क की शीघ्र मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए हैं।