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राम मंदिर हिंदू धर्म की आस्था का प्रतीक

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खप्टिहा कलां। सिद्धपीठ सद्गुरु सदन गढ़ी दाई परिसर में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा के आठवें दिन जगन्नाथ पीठाधीश्वर राघव दास महाराज (अयोध्या) ने कहा कि अयोध्या का राम मंदिर हिंदू धर्म की आस्था का प्रतीक है। रामराज की परिकल्पना से विश्व कल्याण निश्चित है।
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आह्वान किया कि शोक-मोह की मुक्ति के लिए रामराज की स्थापना करें। उन्होंने रामचरित मानस की चौपाई रामप्रताप विषमता खोई, बयरु न कर काहू सन कोई का महत्व बताया। कहा कि वर्तमान परिदृश्य में भाई ही भाई का दुश्मन बनता जा रहा है। ऐसे में रामराज की परिकल्पना संभव नहीं है।
इसके लिए आपस में प्रेम रखकर अपने स्वधर्म का पालन करते हुए नीतिगत कार्यों को करें। तभी मानव का कल्याण है। उन्होंने श्रीराम केवट संवाद, चित्रकूट निवास, ऋषि मुनियों से भेंट, जयंत को दंडित करना, गिद्धराज से भेंट, पंचवटी निवास आदि का भी प्रसंग सुनाया।
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भगवान के अवतारों का वर्णन करते हुए कहा कि अयोध्या का राम मंदिर हिंदू धर्म की आस्था का प्रतीक है। विश्व की आत्मा है। आत्मा नहीं रहेगी तो शरीर का कोई अस्तित्व नहीं रहता।
आर्गन पर पंडित सुभाष अवस्थी, बैजों में अशोक विश्वकर्मा, तबला पर योगेंद्र तिवारी, गुड्डन तिवारी, अर्जुन चंदेल, गायक कलाकार रामदास आदि ने संगत दी। 13 अगस्त को कथा का समापन व 14 को भंडारा होगा।
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