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रेलवे अंडरपास की दीवार ढही, आवागमन ठप

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बांदा। यूपी व एमपी को जोड़ने वाले करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए रेलवे अंडरपास की एक साइड की दीवार शुक्रवार को सुबह भरभराकर गिर गई। हादसे के वक्त आवागमन अधिक नहीं था। लिहाजा कोई बड़ा हादसा नहीं हो सका। सूचना के 10 घंटे बाद रेलवे के अधिकारियों ने मुआयना कर जांच के आदेश दिए।
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अंडरपास के आवागमन को रोक दिया गया है। मलबे को हटाने के लिए दो दर्जन से अधिक मजदूरों को लगाया गया है। झांसी रेलवे ट्रैक में दुरेड़ी गांव के पास वर्ष 2012 में 3.90 करोड़ रुपये की लागत से अंडरपास बनाया गया था, लेकिन एक दशक भी पूरा नहीं कर सका और शुक्रवार की सुबह अंडरपास की करीब 25 मीटर लंबी दीवार भरभराकर गिर गई।
सूचना मिलने पर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर आवागमन रोक दिया गया। आरपीएफ के चार जवानों की ड्यूटी लगा दी गई। मलबा हटाने को दो दर्जन से अधिक मजदूरों को लगाया गया है।
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अंडरपास से एमपी व यूपी के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों का आवागमन है। प्रतिदिन दर्जनों की संख्या में बालू भरे ट्रक व ट्रैक्टर निकलते हैं। अंडरपास निर्माण के समय गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए थे, लेकिन रेलवे के अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
जिसके चलते अंडरपास की दीवार गिर गई। स्टेशन अधीक्षक केके कुशवाहा ने बताया कि अंडरपास की दीवार गिरने की जानकारी रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है। उधर, सहायक मंडलीय अभियंता (कार्य) प्रदीप कुमार ने निरीक्षण कर जांच के आदेश दिए।
अधिशासी अभियंता शिव सिंह का कहना है कि गुणवत्ता के साथ बनाया गया था। इसकी कई बार जांच की गई है। दीवार कैसे गिरीं, इसका पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। सिटी मजिस्ट्रेट केशवनाथ गुप्ता और सीओ राकेश कुमार सिंह भी पहुंचे।
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