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खेल से खिलवाड़, क्रीड़ाधिकारी का वेतन रोका

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Playing with the game, sports officer's salary stopped - फोटो : BANDA
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बांदा। जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम की चौपट व्यवस्था देखकर डीएम अनुराग पटेल का पारा चढ़ गया। जिला क्रीड़ाधिकारी का तत्काल प्रभाव से वेतन रोक दिया। खिलाड़ियों को सुविधाएं न मिलने से हाल ही में युवा क्रिकेटर मनीष ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
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गुरुवार को डीएम ने सुबह 10:30 से 11:30 तक स्टेडियम की खबर ली। यहां क्रीड़ांगन मद में 3,69,595 रुपये, स्टेडियम, छात्रावास और तरण ताल के लिए 50-50 हजार रुपये मिले हैं। कुल 5,19,595 रुपये में क्रीड़ांगन मद में 1,48,800 रुपये खर्च बताए गए हैं, लेकिन स्टेडियम के हाल यह हैं कि बड़ी-बड़ी घास, स्वीमिंग पुल सबमर्सिबल पाइप, पुराना फ्रिज, कटिंग मशीन का ढक्कन, चूना की बोरी, पुराना वाटर कूलर, अलमारी और तमाम कबाड़ कमरे और शौचालय में भरा मिला। दरवाजों की जाली और बाथरूम में पानी नहीं था।
क्रीड़ाधिकारी ने कहा कि 1995 में बना स्वीमिंग पुल आज तक चालू नहीं हो पाया। इसमें भयंकर गंदा पानी भरा हुआ है। आठ सोडियम लाइट खराब मिलीं। महिला चेंज रूम में भी पुराना सामान और कबाड़ भरा मिला। बैडमिंटन कोर्ट आफिस का बाथरूम गंदा था।
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महिलाओं के बाथरूम में पानी नहीं था। डीएम के पूछने पर बताया गया कि यहां की मरम्मत के लिए विकास प्राधिकरण ने 20 लाख और खेल निदेशालय ने 29.66 लाख रुपये दिए। बैडमिंटन हाल के बगल में भी कबाड़ मिला। टीटी टेबल इंट्री के पास पैकिंग फटी और जिम सामग्री के तार टूटे मिले। इसके लिए शासन ने पिछले वर्ष 71.42 लाख रुपये दिए गए थे, जिन्हें वापस कर दिया गया। पैसा वापस क्यों हुआ? क्रीड़ाधिकारी सही जवाब नहीं दे सके।
चार दिन पहले की स्टेडियम में खेलने आने वाले मनीष सिंह ने आत्महत्या कर ली थी। यहां प्रैक्टिस के लिए स्टंप आदि भी नहीं है। पिच रोलर दो साल से खराब पड़ा है। डीएम को लगभग सभी जगह अव्यवस्थाएं टूट-फूट और गंदगी मिली।
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